What Is Rahu Kaal In Astrology During Rahu Kaal Time Why Auspicious Work Is Not Done | ज्योतिष में क्या है राहुकाल का महत्व, क्यों नहीं किया जाता कोई भी शुभ कार्य? जानें सबकुछ

किसी व्यक्ति के जीवन में अर्थात यदि कुंडली में राहु दोष हो तो उसे मानसिक तनाव, आर्थिक नुकसान, रोग और दुखों का सामना करना पड़ता है। ज्योतिष शास्त्र में राहु दोष से मुक्ति के लिए कई तरह के उपाय बताए गए हैं।

ज्योतिष में क्या है राहुकाल का महत्व, क्यों नहीं किए जाते कोई शुभ कार्य?  सब कुछ जानिए

राहु काल

छवि क्रेडिट स्रोत: ट्विटर

ज्योतिष में राहुकाल: हिन्दू धर्म और वैदिक ज्योतिष में किसी भी शुभ कार्य को संपन्न करने के लिए शुभ मुहूर्त जरूर माना जाता है। मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में किया गया कार्य हमेशा सफल होता है। ज्योतिष किसी भी पर्व या धार्मिक अनुष्ठानों में योग, मुहूर्त, ग्रह-नक्षत्रों की चाल और समय की गणना अवश्य की जाती है। जिस तरह से शुभ मुहूर्त की गणना की जाती है उसी तरह से अशुभ मुहूर्त पर विशेष ध्यान दिया जाता है। राहु काल का उल्लेख अशुभ काल में अवश्य होता है। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है। दैनिक जीवन में कोई भी शुभ कार्य राहु काल का विचार करके ही किया जाता है। आइए जानते हैं ज्योतिष में राहुकाल क्या है। इसकी गणना कैसे की जाती है और इसमें शुभ कार्य क्यों वर्जित माने जाते हैं?

राहुकाल क्या है

राहुकाल, जैसा कि नाम से पता चलता है, राहु और काल का अर्थ है। वैदिक ज्योतिष में राहु ग्रह को बहुत ही पापी और क्रूर ग्रह माना गया है। राहु का बुरा प्रभाव देवी-देवताओं पर भी पड़ता है। किसी व्यक्ति के जीवन में अर्थात यदि कुंडली में राहु दोष हो तो उसे मानसिक तनाव, आर्थिक नुकसान, रोग और दुखों का सामना करना पड़ता है। राहु से प्रभावित जातकों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ज्योतिष शास्त्र में राहु दोष से मुक्ति के लिए कई तरह के उपाय बताए गए हैं। वहीं काल का अर्थ है समय खंड। जिसे वैदिक ज्योतिष में शुभ नहीं माना जाता है। इस काल के स्वामी राहु हैं, इस कारण राहु का प्रभाव सबसे अधिक होता है। ऐसे में इस दौरान कोई भी महत्वपूर्ण कार्य नहीं किया जाता है। इस काल में जिसे राहुकाल का समय कहा जाता है, इसमें किए गए कार्यों का अच्छा फल नहीं मिलता है। इसे राहुकाल कहते हैं। राहु की दशा रोज होती है।

राहुकाल की गणना कैसे की जाती है?

राहुकाल निश्चित रूप से हर एक दिन होता है। दिन के किस समय राहुकाल है और किस समय राहुकाल नहीं है, इसकी गणना पंचांग और वैदिक ज्योतिष में बताए गए सूत्रों के आधार पर की जाती है। राहु काल का समय जगह-जगह बदलता रहता है क्योंकि इसकी गणना सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पर आधारित होती है। आइए जानते हैं राहुकाल की गणना कैसे की जाती है।

सबसे पहले आप जिस स्थान पर राहुकाल का पता लगाना चाहते हैं उस दिन के सूर्योदय और सूर्यास्त का समय ज्ञात कर लें। फिर इस पूरे समय को 8 बराबर भागों में बांट लें। राहुकाल का समय लगभग डेढ़ घंटे का होता है। मान लीजिए कि आप जिस स्थान पर रहते हैं, वहां सूर्योदय सुबह 6 बजे होता है और सूर्यास्त शाम को 6 बजे होता है। इस प्रकार दूसरा सोमवार को, सातवां मंगलवार को, पांचवां बुधवार को, छठा गुरुवार को, चौथा शुक्रवार को, तीसरा शनिवार को और आठवां भाग रविवार को राहुकाल कहलाता है।

सप्ताह का राहुकाल समय

सोमवार सुबह 7:30 – 9:00 बजे

मंगलवार दोपहर 3:00 – शाम 4:30 बजे

बुधवार 12:00 पूर्वाह्न – 1:30 अपराह्न

गुरुवार दोपहर 1:30 – दोपहर 2:00 बजे

शुक्रवार सुबह 10:30 – दोपहर 12:00 बजे

शनिवार सुबह 9:00 – 10:30 बजे

रविवार शाम 4:30 – शाम 6:00 बजे

राहुकाल में क्या करें और क्या न करें

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहुकाल में कई काम नहीं करने चाहिए। जानिए कौन से काम नहीं करने चाहिए। राहुकाल में कोई भी नया कार्य न करें। राहुकाल के समय को ध्यान में रखते हुए कार्य को पहले या बाद में शुरू करें। यदि गृह प्रवेश करना ही हो तो राहुकाल में न करें। राहुकाल में कोई भी नई महंगी विलासिता की वस्तु न खरीदें। राहुकाल में कोई भी व्यवसाय शुरू न करें।

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