ध्यान (क्रिया) क्या है? और यह कैसे काम करती है ?

ध्यान एक तरीका और अभ्यास है जिसके जरिए हम अपने विचारों को वश में कर पाते है और भावनात्मक रुप से शांंत हो पाते है।

हिंदू धर्म के अनुसार ध्यान की परिभाषा कुछ इस तरह से दी गई है “योग और ध्यान एक जरिया है

जिससे अपने शरीर और आत्मा का जुड़ाव महसूस करते हैं”।

हम अधिकतर लोग जो ध्यान करते है वो साधारण ध्यान होता है। जिसमें हम अपने सांसो पर ध्यान देते है 

या फिर मन में कोई कल्पना करते है और उस कल्पना में ध्यान केद्रिंत करते है।

ध्यान के काम करने के तरीकें को हम वैज्ञानिक रुप से देखते है। वैज्ञानिकों के अनुसार दिमाग में पांच प्रकार की तंरग (brainwave) होती है।

इन तंरगों की आवृत्ति जितनी कम होगी हम उतना ही अपने आपको शांत पाएंगे।

ध्यान के वक्त हमारी दिमागी तंरग अल्फा में पहुंचती है। जहां हम खुद को थोड़ा शांत पाते है। 

ध्यान में हम जितना निपुण होते जांएगे ये दिमागी तंरग अल्फा से थीटा और थीठा से डेल्टा होती जाती है।

थीठा स्थिति में ही हम अपने आपको शांत पाएंगे और जटिल परेशानी को भी शांति से सुलझा लेते है।

डेल्टा स्थिति में बौद्ध भिक्षु होते है जो सालों के मेहनत में ये स्थिति पाते है 

और इस स्थिति को भी वश में रख पाते है। हम डेल्टा स्थिति में सिर्फ गहरी नींद मे ही हासिल कर पाते है।

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