Karwa Chouth Pooja Vidhi

ऐसे करे करवा चौथ की पूजा नियम के साथ

चांद निकलने का समय

पति की लंबी उम्र के लिए सुहागिनें करवाचौथ का निर्जल व्रत 13 अक्तूबर गुरुवार को रखेंगी। ऐसी मान्यता है कि करवाचौथ व्रत रखने से पति के जीवन में किसी भी तरह का कष्ट नहीं आते हैं। साथ ही पति को लंबी आयु की प्राप्ति होती है।

वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, इस दिन कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का मान संपूर्ण दिन और रात में दो बजकर 58 मिनट तक है। कृतिका नक्षत्र शाम सात बजकर 43 मिनट पश्चात रोहिणी नक्षत्र है।

चंद्रमा रोहिणी से अत्यंत प्रेम करते हैं। इसलिए इस दिन व्रत रख रोहिणी नक्षत्र में पूजन करने से सुहागिनों के पति को दीर्घायु होते हैं और दांपत्य जीवन में मधुरता आती है।

करवाचौथ के व्रत में शिव, पार्वती, कार्तिकेय, गणेश और चंद्रमा के पूजन करने का विधान है। बताया कि महाभारत से संबंधित पौरणिक कथा के अनुसार, पांडव पुत्र अर्जुन तपस्या करने नीलगिरी पर्वत जाते हैं। दूसरी ओर बाकी पांडवों पर कई प्रकार के संकट पड़ते हैं।

द्रौपदी भगवान श्रीकृष्ण से उपाय पूछती हैं। तब श्रीकृष्ण कहते हैं कि यदि वह कर्तिक कृष्ण चतुर्थी के दिन करवाचौथ का व्रत करें तो इन सभी संकटों से मुक्ति मिल सकती है। द्रौपदी विधि-विधान सहित करवाचौथ का व्रत रखती है। इससे उनके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

पूरे दिन निर्जल व्रत रख शाम को भगवान शिव-पार्वती, कार्तिकेय, गणेश और चंद्रमा का पूजन करें। उनके समक्ष लड्डू रखकर नैवेद्य अर्पित करें। एक लोटा, एक वस्त्र और दक्षिणा समर्पण करें। विधि-विधान से पूजन करें। करवाचौथ की कथा सुनें या स्वयं वाचन करें। चंद्रमा के उदय होने पर चंद्रमा का पूजन कर अर्घ्य दें। इसके पश्चात निराजल व्रत का पारण करें।

चंद्रोदय शाम सात बजकर 54 मिनट पर होगा। उसी समय व्रती महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देकर करवा चौथ की पूजा संपन्न करेंगी। इसके बाद वह पति को देखते हुए व्रत का पारण करेंगी।

रामायण के अनुसार, एक बार श्रीराम ने पूर्व दिशा की ओर चमकते हुए चंद्रमा को देखा तो पूछा कि चंद्रमा में जो कालापन है, वह क्या है। सभी लोगों ने अपने-अपने तर्क दिए। तभ श्रीराम ने कहा कि चंद्रमा में कालापन उसके विष के कारण है। अपनी विषयुक्त किरणों से वह वियोगी नर-नारियों को जलाता रहता है।

मनोवैज्ञानिक तर्क के अनुसार, जो पति-पत्नी किसी कारणवश एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं उनपर चंद्रमा की विषयुक्त किरणें कष्ट पहुंचाती हैं। इसलिए करवा चौथ पर चंद्रमा की पूजा कर महिलाएं कामना करती हैं कि चंद्रमा के कारण उन्हें अपने पति का वियोग न सहना पड़े।