हर व्यक्ति  को अपने जीवनकाल में ज़रूर लगाने चाहिए ये पेड़

सनातन हिंदू धर्म में पेड़-पौधों का विशेष धार्मिक महत्व होता है. शास्त्रों में ऐसे कई पेड़-पौधों के बारे में बताया गया है जो पूजनीय और शुभ माने जाते हैं. तुलसी, पीपल, केला, आंवला, बरगद जैसे कई पेड़-पौधे हैं, जिनकी पूजा हिंदू धर्म में की जाती है.

मान्यता है कि ये पेड़-पौधे देवताओं को प्रिय होते हैं और इनमें उनका निवास होता है. वहीं, कुछ पेड़-पौधों को लगाने से पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है.

भविष्य पुराण के अनुसार, वृक्ष रोपण को संतानोत्पत्ति के समान माना गया है. शास्त्रों में कुछ ऐसे ही पेड़-पौधे का वर्णन किया गया है, जिन्हें अपने जीवनकाल में लगाने से व्यक्ति को मरणोपरांत नरक का मुंह नहीं देखना पड़ता है.

इससे मरने के बाद भी व्यक्ति को पुण्यफल की प्राप्ति होती है और व्यक्ति नरक की यातनाओं से मुक्त रहता है. साथ ही जीवनकाल में उसे पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है

वृक्षारोपण के संबंध में भविष्य पुराण में श्रीकृष्ण ने कहा है कि व्यक्ति को ऐसे पड़े लगाने चाहिए, जिसके फल, फूल, मूल, छाल, लकड़ी, पत्तियां और छाया से सभी प्राणियों का भला हो सके. इनमें तुलसी, करी पत्ता, नीम, आम, केला और आवंला जैसे पेड़-पौधे महत्वपूर्ण माने जाते हैं.

तुलसी: जीवनकाल में तुलसी का पौधा लगाने से वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है. इससे व्यक्ति वर्तमान और अगले जन्म में भी धनवान बनता है.

किस वृक्ष से मिलेगा कौन सा पुण्य

नीम: नीम बहुत ही गुणकारी पौधा होता है. घर पर इसके होने से लोग इसकी जड़, पत्तियां और लकड़ियों का लाभ उठा सकते हैं और कई रोगों से मुक्त रह सकते हैं. नीम का वृक्ष लगाने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है.

किस वृक्ष से मिलेगा कौन सा पुण्य

आम: शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति जीवनकाल में आम का पेड़ लगाता है, उसे अगले जन्म में भी धन-धान्य व समृद्धि की प्राप्ति होती है.

किस वृक्ष से मिलेगा कौन सा पुण्य

केला: केले में देवगुरु बृहस्पति का वास होता है. इस पेड़ के रोपण से कभी भी आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ता है.

किस वृक्ष से मिलेगा कौन सा पुण्य

करी पत्ता: यदि आप कोई बड़ा पेड़ नहीं लगा सकते हैं या घर पर इसके लिए पर्याप्त स्थान नहीं है तो ऐसे में घर पर करी पत्ता ज़रूर लगाएं. इसे मीठा नीम भी कहा जाता है और इसकी पत्तियों में औषधीय गुण भी होते हैं.

किस वृक्ष से मिलेगा कौन सा पुण्य