Utpanna ekadashi 2022 kab hai aur know date time and puja shubh muhurat in hindi | Utpanna Ekadashi 2022: नवंबर महीने में पड़ने जा रही दूसरी एकादशी, जानें शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को उत्पन्ना एकादशी कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आइए जानते हैं इस एकादशी का महत्व।

उत्पन्ना एकादशी 2022: नवंबर के महीने में पड़ने वाली है दूसरी एकादशी, जानिए शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

कब पड़ेगी उत्पन्ना एकादशी?

छवि क्रेडिट स्रोत: pixabay.com

उत्पन्ना एकादशी: हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी व्रत करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि जो भी इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करता है और व्रत रखता है उसकी हर मनोकामना पूरी होती है। एकादशी का व्रत हर महीने में दो बार आता है, यानी कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के दिन। हिन्दू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को उत्पन्ना एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस बार उत्पन्ना एकादशी 20 नवंबर 2022 को पड़ रही है। एकादशी माता को भगवान विष्णु का रूप माना जाता है, जिनकी पूजा से मनोवांछित सफलता मिलती है। आइए जानते हैं उत्पन्ना एकादशी का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व।

पूजा तिथि और मुहूर्त

पंचाग के अनुसार मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली उत्पन्ना एकादशी 19 नवंबर 2022 को सुबह 10 बजकर 29 मिनट से शुरू होकर अगले दिन 20 नवंबर 2022 को सुबह 10 बजकर 41 मिनट तक रहेगी। . वहीं पारण का समय सुबह 06 बजकर 48 मिनट से 08 बजकर 56 मिनट तक है.

धार्मिक महत्व

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, राक्षस मूर को मारने के लिए भगवान विष्णु के शरीर से एकादशी का जन्म हुआ था। ऐसा माना जाता है कि राक्षस मूर सोते हुए भगवान विष्णु को मारना चाहता था। इस दिन भगवान विष्णु के भक्त उनकी कृपा पाने के लिए व्रत रखते हैं। इस एकादशी का महत्व इसलिए भी है क्योंकि इस एकादशी को व्रत की उत्पत्ति का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि उत्पन्ना एकादशी का व्रत करने वाले के सभी पाप धुल जाते हैं।

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पूजा विधि

  • सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें।
  • इसके बाद भगवान विष्णु का गंगाजल से अभिषेक करें और उन्हें फूल और तुलसी अर्पित करें।
  • इसके बाद उनकी आरती उतारें और उन्हें भोग लगाएं। हो सके तो पूरे परिवार के साथ पूजा करें।
  • इसके बाद एकादशी व्रत कथा का पाठ करें और विष्णु चालीसा का पाठ करें।
  • हो सके तो इस दिन किसी ब्राह्मण को भोजन भी कराएं।

(यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और लोक मान्यताओं पर आधारित है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसे आम जनहित को ध्यान में रखते हुए यहां प्रस्तुत किया गया है।)

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