Somvar vrat niyam what to do on monday fasting and how to worship lord shiva | अगर रखते हैं सोमवार का व्रत तो जरूर ध्यान रखें इन बातों का, प्रसन्न रहेंगे महादेव

सोमवार व्रत: हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार का दिन देवों के देव महादेव को समर्पित है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। लेकिन व्रत के दौरान कुछ नियमों का ध्यान रखना चाहिए, आइए जानते हैं क्या हैं वो…

सोमवार का व्रत रखते हैं तो इन बातों का जरूर रखें ध्यान, प्रसन्न होंगे महादेव

सोमवार व्रत के उपाय

छवि क्रेडिट स्रोत: pixabay.com

हिंदू धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवता को समर्पित होता है। माना जाता है कि सोमवार का दिन भगवान शंकर का होता है। इस दिन विधि-विधान से भोलेनाथ की पूजा करने और व्रत रखने से वे प्रसन्न होते हैं। मान्यता है कि सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। संभव हो तो इस दिन किसी मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल या दूध अवश्य चढ़ाएं। महादेव के साथ माता पार्वती की पूजा भी फलदायी और शुभ मानी जाती है। लेकिन सोमवार के व्रत में कुछ गलतियां करने से बचना चाहिए। आइए जानते हैं कि इस दिन क्या करना चाहिए और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

सोमवार व्रत के नियम

  • इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद शीघ्र संकल्प लें।
  • इसके बाद शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। ध्यान रहे जिस बर्तन में आप पानी रखते हैं उसमें थोड़ा सा गंगाजल डाल दें।
  • जल चढ़ाने के बाद शिवलिंग पर दूध, दही, शहद चढ़ाएं। इसके साथ ही भगवान शिव को चमेली का फूल भी चढ़ाएं। माना जाता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि आती है।
  • पूजा के बाद शिवलिंग के पास दीपक जलाएं और उससे माता पार्वती और भोलेनाथ की आरती करें।
  • आरती के बाद मंदिर की परिक्रमा जरूर करें, लेकिन ध्यान रहे कि कभी भी परिक्रमा पूरी न करें। शिवलिंग का दूध जहां बहे वहीं रुक जाएं और वापस मुड़ जाएं।
  • इस दिन व्रती को तीन पहर में से एक समय ही भोजन करना चाहिए।

भूलकर भी न करें ये गलतियां

भगवान शिव की पूजा करते समय कुछ गलतियां आपके लिए अशुभ साबित हो सकती हैं। भूलकर भी पूजा के समय शिवलिंग पर मालती, चंपा, चमेली, केतकी आदि फूल नहीं चढ़ाएं। भोलेनाथ की पूजा में शंख या करतल का प्रयोग नहीं करना चाहिए। शिवलिंग पर उल्टा शमीपत्र और बेलपत्र चढ़ाना चाहिए और साथ ही पीछे के मोटे डंडों को भी तोड़ देना चाहिए। परिक्रमा करते समय ध्यान रहे कि आधी परिक्रमा करें और जिस स्थान पर शिवलिंग का जल बहे वहां से लौट जाएं।

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(यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और लोक मान्यताओं पर आधारित है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसे आम जनहित को ध्यान में रखते हुए यहां प्रस्तुत किया गया है।)

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