Shiv Puran Ke 5 Rahesya in Hindi

Shiv Puran Ke 5  Rahesya in Hindi


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हर मनुष्य के जीवन में कभी न कभी ऐसा समय आता है जब उसे सही गलत तथ्य मिथ्या में अंतर करना बहुत कठिन लगने लगता है ,जीवन का वास्तविक अर्थ समझने के लिए वह किताबों ज्ञानी व्यक्तियों आदि तरीकों का सहारा लेने लगता है लेकिन जीवन का सबसे बड़ा सत्य तो यह है कि अपने अपने अनुभव के आधार पर सभी के लिए जीवन का अर्थ भी अलग है लेकिन जीवन से जुड़े कुछ ऐसे रहस्य हैं
जिनके बारे में जानकर अपने जीवन को सरल बनाया जा सकता है शिव पुराण में भगवान शिव ने देवी पार्वती को जीवन के 5 रहस्य बताएं हैं जिन्हें जानकर कोई भी मनुष्य जीवन की हर दुविधा और समस्या से मुक्ति पा सकता है

Shiv Puran के अनुसार क्या है सबसे बड़ा धर्म और सबसे बड़ा पाप

देवी पार्वती के पूछने पर भगवान शिव ने उन्हें मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा धर्म और अधर्म मानी जाने वाली बात के बारे में बताया है भगवान शंकर कहते हैं मनुष्य के लिए सबसे बड़ा धर्म है सत्य बोलना या सत्य का साथ देना और सबसे बड़ा अधर्म है असत्य बोलना या उस का साथ देना इसलिए हर किसी को अपने मन अपनी बातें और अपने कामों से हमेशा उन्ही को शामिल करना चाहिए जिनमें सच्चाई हो क्योंकि इससे बड़ा कोई धर्म नहीं है असत्य कहना या किसी भी तरह का झूठ का साथ देना मनुष्य की बर्बादी का कारण बन सकता है

Shiv Puran से सीखे कैसे अपना काम करे

मनुष्य को अपने हर काम का साक्षी यानी गवाह खुद ही बनना चाहिए फिर वह अच्छा काम करें या बुरा उसे कभी भी यह नहीं सोचना चाहिए कि उसके कर्मों को कोई देख नहीं रहा कई लोगों के मन में गलत काम करते समय यही भाव मन में होता है कि उन्हें कोई नहीं देख रहा और इसी वजह से वे बिना किसी भी डर के पाप कर्म करते जाते हैं लेकिन सच्चाई कुछ और ही होती है मनुष्य अपने सभी कर्मों का साक्षी खुद ही होता है अगर मनुष्य हमेशा यह एक भाव मन में रखेगा तो वह कोई भी पाप कर्म करने से खुद ही खुद को रोक लेगा

Shiv Puran के अनुसार कभी ना करें यह तीन काम

काम करने की इच्छा आदि भगवान शिव कहते हैं किसी भी मनुष्य को मन वाणी और कर्मों से पाप करने की इच्छा नहीं करनी चाहिए क्योंकि मनुष्य जैसा काम करता है उसे वैसा फल भोगना ही पड़ता है यानी मनुष्य को अपने मन में ऐसी कोई बात नहीं आने देना चाहिए जो धर्म ग्रंथों के अनुसार पाप मानी जाए ना अपने मुंह से कोई ऐसी बात नहीं करनी चाहिए और ना ही ऐसा का कोई काम करना चाहिए जिससे दूसरों को कोई परेशानी या दुख पहुंचे

Shiv puran से सीखे सफल होना

संसार में हर मनुष्य को किसी ने किसी मनुष्य वस्तु या परिस्थिति से आश्रित यानी लगाव होता ही है और लगाओ और वह एक ऐसा जाल होता है जिससे छूट पाना बहुत ही मुश्किल होता है , भगवान् शिव कहते हैं मनुष्य को जिस भी व्यक्ति या परिस्थिति से लगाव हो रहा हो जो कि उसकी सफलता में रुकावट बन रही हो मनुष्य उसमें दोस्त ढूंढना शुरू कर देना चाहिए सोचना चाहिए कि यह में कुछ पल का लगाव हमारी सफलता का बाधक बन रहा है ऐसा करने से धीरे-धीरे मनुष्य लगाव और मुंह के जाल से छूट जाएगा और अपने सभी कामों में सफलता पाने लगेगा

Shiv Puran से सीखे खुश कैसे रहे

यह एक बात समझ लेंगे तो वह नहीं करना पड़ेगा दुखो का सामना शिव मनुष्य को कहते हैं मनुष्य की तृष्णा यानी इच्छाओं से बड़ा कोई दुख नहीं होता और उन्हें छोड़ देने से बड़ा कोई सुख नहीं है मनुष्य का अपने मन पर विश्वास नहीं होता हर किसी के मन में कई अनावश्यक इच्छाएं होती है और यही इच्छा है मनुष्य के दुखों का कारण बनती है जरूरी है कि मनुष्य अपनी आवश्यकताओं और इच्छाओं में अंतर समझें और फिर अनावश्यक इच्छाओं का त्याग करके शांत मन से जीवन बिताए |
|| ॐ नमः शिवाय ||
दोस्तों कैसा लगा आपको जरुर बताए , और अपना प्यार और आशीर्वाद जरुर दिखाए |

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