Shani Remedies to get rid of troubles know its significance in hindi | अगर जीवन में शनि का है प्रकोप तो ये उपाय करेंगे सभी कष्ट दूर, होंगे कार्य सफल

जब भी शनि की साढ़ेसाती का नाम आता है तो लोगों के मन में कुछ अनिष्ट होने का भय बना रहता है। माना जाता है कि अगर शनि का प्रकोप किसी पर पड़ जाए तो उसके जीवन में कई तरह की परेशानियां आने लगती हैं। आइए जानते हैं इससे बचने के उपाय।

अगर जीवन में है शनि का प्रकोप तो इन उपायों से दूर होंगे सारे संकट, काम होंगे सफल

शनि के प्रकोप से बचने के उपाय

छवि क्रेडिट स्रोत: pixabay.com

ज्योतिष शास्त्र में शनि को बहुत ही शक्तिशाली और महत्वपूर्ण माना जाता है। माना जाता है कि शनि यदि दयालु हो तो व्यक्ति को रंक से राजा बना देता है। वहीं अगर शनि नाराज हो जाएं तो इंसान को राजा भी बना सकते हैं। जब किसी भी व्यक्ति के जीवन में शनि का प्रकोप होता है तो उसके जीवन में अनचाही परेशानियां आने लगती हैं। ज्योतिष शास्त्र में शनि के प्रकोप को पहचानने के कुछ उपाय भी बताए गए हैं। अगर आप भी शनि के कोप से परेशान हैं तो ये उपाय करने से आपकी परेशानी दूर हो सकती है।

  1. शनि के प्रकोप से बचने के लिए ग्यारह लड़ियों वाला एक नारियल लें और उसे अपने दाहिने हाथ में पकड़कर एक-एक करके दाएं से बाएं घुमाएं और फिर जल प्रवाहित कर दें। माना जाता है कि इस उपाय से शनि संबंधी सभी दोष दूर हो जाते हैं और सुख-समृद्धि आती है।
  2. यदि आप पर शनि की पीड़ा है तो इस दौरान भूलकर भी मांस-मदिरा का सेवन न करें। माना जाता है कि इससे शनिदेव नाराज हो जाते हैं और उनका कोप और भी उग्र हो जाता है।
  3. शनि दोष से बचने के लिए किसी भी गरीब, विकलांग व्यक्ति को बेवजह परेशान न करें। हो सके तो जरूरतमंदों को कंबल, जूते, कपड़े आदि दान करें। मान्यता है कि इससे आपके सभी दुखों का नाश होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है।
  4. शनि दोष से बचने के लिए सरसों का तेल काफी कारगर माना जाता है। एक कटोरी में सरसों का तेल लेकर उसमें पहले अपना चेहरा देखें और फिर शनिदेव को अर्पित करें। माना जाता है कि इस उपाय से शनि संबंधी सभी दोष दूर हो जाते हैं।
  5. माना जाता है कि जब शनि का प्रकोप आप पर हो तो आपको हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए। माना जाता है कि जो लोग हनुमान जी की पूजा करते हैं उन्हें शनि की नजर नहीं लगती है।

(यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और लोक मान्यताओं पर आधारित है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसे आम जनहित को ध्यान में रखते हुए यहां प्रस्तुत किया गया है।)

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