Margashirsha Month 2022 Festivals Aghan Maas Vrat Tyohar puja Vidhi niyam in Hindi | Aghan Month 2022: आज से शुरू हुआ अगहन मास, जानें इसका धार्मिक महत्व एवं नियम

कार्तिक मास के बाद आज से मार्गशीर्ष मास की शुरुआत हो रही है. भगवान श्री कृष्ण की भक्ति और भगवान श्री राम के विवाह से जुड़े शुभ पर्व के लिए जाने जाने वाले पवित्र मास के धार्मिक महत्व और नियमों को जानने के लिए इस लेख को अवश्य पढ़ें।

अगहन मास 2022: आज से शुरू हुआ अगहन मास, जानिए इसका धार्मिक महत्व और नियम

मार्गशीर्ष मास 2022 (अगहन)

पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के बाद आज से मार्गशीर्ष या कहें अगहन मास की शुरुआत हो रही है। हिंदू धर्म में इस महीने को बहुत ही पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार अगहन का महीना भगवान श्री कृष्ण की विशेष पूजा के लिए जाना जाता है। वर्ष 2022 में अगहन मास 09 नवंबर 2022 से 08 दिसंबर 2022 तक रहेगा। मार्गशीर्ष मास के बारे में मान्यता है कि इसी माह से सतयुग का प्रारंभ हुआ था। यह भी माना जाता है कि महर्षि कश्यप ने इसी महीने में कश्मीर राज्य की स्थापना की थी। आइए मार्गशीर्ष मास के धार्मिक महत्व और नियम आदि के बारे में विस्तार से जानते हैं।

मार्गशीर्ष मास का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में कार्तिक महीने के बाद आने वाले महीने को मार्गशीर्ष कहा जाता है क्योंकि इस महीने के शुक्लपक्ष के अंतिम दिन यानी पूर्णिमा को चंद्रमा मृगशिरा नक्षत्र में रहता है। इसी नक्षत्र के नाम पर इस शुभ मास का नाम मार्गशीर्ष पड़ा। मार्गशीर्ष या कहें अगहन मास जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति और पुण्य की प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ बताया गया है। इस शुभ मास में किसी भी पवित्र नदी या सरोवर आदि में स्नान और दान करने का विशेष महत्व होता है। मार्गशीर्ष मास में भगवान श्री कृष्ण की पूजा बहुत फलदायी मानी जाती है।

अगहन मास का तीज पर्व

अगहन का महीना न केवल भगवान कृष्ण की पूर्ण रूप से विशेष पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, बल्कि इस महीने में आने वाले कई देवी-देवताओं की पूजा से जुड़े तीज-त्योहार भी मनाए जाते हैं। इस साल अगहन महीने की शुरुआत भगवान शिव के अवतार माने जाने वाले काल भैरव की पूजा से जुड़े पावन पर्व कालभैरव अष्टमी से होगी. इसके बाद इस शुभ मास में उत्पन्ना एकादशी, विवाह पंचमी, नंदा सप्तमी, मोक्षदा एकादशी आदि बड़े पर्व पड़ेंगे।

अगहन मास के नियम

मार्गशीर्ष मास या कहें अगहन में प्रतिदिन विधि-विधान से भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करनी चाहिए और श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करना चाहिए। अगहन के महीने में नित्य तुलसी जी की सेवा और पूजा करें। मान्यता है कि अगहन के महीने में रोज शाम को तुलसी जी को शुद्ध घी चढ़ाने और प्रसाद के रूप में तुलसी के पत्तों का सेवन करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। अगहन मास में प्रतिदिन तुलसी की माला से ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का जाप करने से श्री हरि की कृपा प्राप्त होती है। मार्गशीर्ष मास में प्रतिदिन किसी पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करना चाहिए।

(यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और लोक मान्यताओं पर आधारित है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसे आम जनहित को ध्यान में रखते हुए यहां प्रस्तुत किया गया है।)

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