Margashirsha amavasya 2022 when is margashirsha amavasya date time and remedies | Margashirsha Amavasya 2022: पितृ दोष से बचने के लिए करें ये पूजा, जाने शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

मार्गशीर्ष मास या अगहन मास को हिंदू धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इस महीने में श्रीकृष्ण की विशेष पूजा की जाती है। मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मार्गशीर्ष अमावस्या कहते हैं। आइए जानते हैं इसकी पूजा विधि और उपाय

मार्गशीर्ष अमावस्या 2022: पितृ दोष से बचने के लिए करें ये पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

मार्गशीर्ष अमावस्या 2022: जानिए पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

छवि क्रेडिट स्रोत: pixabay.com

मार्गशीर्ष मास में भगवान श्रीकृष्ण की विशेष रूप से पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस महीने में पितरों की पूजा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान-दक्षिणा करने से सारे संकट दूर हो जाते हैं। जिस किसी की कुंडली में पितृ दोष हो उसे अमावस्या का व्रत अवश्य करना चाहिए। मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस महीने में श्रीकृष्ण के अलावा मां लक्ष्मी की पूजा भी फलदायी सिद्ध होती है। आइए जानते हैं कब है अगहन का महीना और क्या है शुभ मुहूर्त।

अमावस्या तिथि और शुभ मुहूर्त

मार्गशीर्ष अमावस्या तिथि: 23 नवंबर 2022, बुधवार अमावस्या तिथि प्रारंभ: 23 नवंबर 2022, बुधवार सुबह 06:56 मिनट अमावस्या तिथि समाप्त: 24 नवंबर 2022, गुरुवार, सुबह 04:29 मिनट स्नान का शुभ मुहूर्त: सुबह 06:56 बजे से ऊपर तक 08:01 मिनट तक

मार्गशीर्ष मास का महत्व

मार्गशीर्ष या अगहन मास का बड़ा धार्मिक महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस महीने में भगवान कृष्ण और मां लक्ष्मी की पूजा सबसे फलदायी होती है। इस दिन भगवान की पूजा के अलावा पितरों की भी पूजा की जाती है। मार्गशीर्ष मास में मृत पितरों का पूजन करने से घर के सभी दोष दूर होते हैं और आपके व आपके परिवार में सुख-समृद्धि आती है। इसी के साथ अगर आप किसी पवित्र नदी में स्नान करते हैं तो आपके सारे पाप धुल जाते हैं. इस दिन व्रत रखने और दान-पुण्य करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

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पूजा विधि

  1. इस दिन सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी, तालाब या सरोवर में स्नान करें। इसके बाद एक साफ बर्तन में जल लेकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। स्नान के बाद बहते जल में तिल प्रवाहित करें और गायत्री मंत्र का जाप करें।
  2. अपने कुल के अनुसार विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करें।
  3. नदी के तट पर पितरों के लिए तर्पण करें और उनकी मुक्ति के लिए प्रार्थना करें।
  4. इस दिन व्रत करने वालों को न तो जल ग्रहण करना चाहिए और न ही किसी प्रकार का भोजन करना चाहिए।
  5. पूजा के बाद किसी जरूरतमंद को दान-दक्षिणा दें और ब्राह्मण को भोजन कराएं।

(यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और लोक मान्यताओं पर आधारित है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसे आम जनहित को ध्यान में रखते हुए यहां प्रस्तुत किया गया है।)

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