Kya Inder Dev सच में बुरे व्यक्ति थे

Kya Inder Dev सच में बुरे व्यक्ति थे

Kya Inder Dev सच में बुरे व्यक्ति थे 

देवराज इंद्र की प्रशंसा की रचनाओ  से ऋग्वेद भरा पड़ा है। वैदिक काल मे, जब ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश त्रिमूर्ति के रूप में प्रचलित नही थे,वायु देव और अग्नि देव के साथ इंद्र देव को प्राचीन काल में त्रिमूर्ति का स्थान प्राप्त था | 

इंद्र सभी देवताओं, गंधर्व, किन्नर, अप्सराओं, मरुतों, वसुओं इत्यादि के सम्राट माने जाते हैं। उन्ही के आदेश पर पवन देव हममे प्राण का संचार करते हैं, वरुण देव जल बन बरसते हैं, सूर्यदेव प्रकाश और ऊष्मा देते हैं और अग्निदेव हमें पवित्र करते हैं। अन्य सभी देवता भी अपने अपने दायित्व का निर्वहन करते हैं। शची इंद्र की धर्मपत्नी है जो सभी देवस्त्रियों की नेत्री बताई गई है।

वेदों में उनकी शक्ति अपार बताई गई है। उनके वज्र का प्रहार असहनीय है। श्रीकृष्ण ने स्वयं कहा है कि उनके सुदर्शन चक्र का सामना इंद्र के वज्र के अतिरिक्त और कोई नही कर सकता। संसार की कोई शक्ति उनके सम्मुख ठहर नही सकती। 

जब इंद्र हाथ मे वज्र ले ऐरावत पर बैठ कर युद्ध के लिए निकलते हैं | तो शत्रुओं उन्हें देखते ही रण छोड़ देते हैं। देवता और मनुष्य सभी उनका सम्मान करते हैं और दैत्य असुर उनके भय से आतंकित रहते हैं। इंद्र त्रिदेवों के कृपापात्र हैं और इन्ही के साथ से इंद्र देव पुरे संसार को संचालित करते थे |

पुराणों में ये भी कहा गया है कि “इंद्र” एक पद है। जो भी स्वर्ग के सिंहासन पर बैठता है | वो इंद्र ही कहलाता है। जैसे ययाति के पिता नहुष ने भी एक बार इंद्र का पद ग्रहण किया था। मारकण्डेय ऋषि से वार्तालाप के समय उर्वशी ने भी कहा था कि मेरे समक्ष कितने इंद्र आये और कितने चले गए। इससे हम से कह सकते है की इंद्र एक पद है , परन्तु इस पर विराजमान होने वाले देव अलग अलग है |

रामायण में इंद्र ने श्रीराम की सहायता के लिए अपना रथ भेजा था। बाली भी इंद्रपुत्र ही था। श्रीराम के पिता दशरथ इंद्र के अभिन्न मित्र थे। महाभारत में भी श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इंद्र के पास ही सभी दिव्यास्त्र लेने को भेजा। 

श्रीकृष्ण के अनुरोध पर इंद्र ने ही दान में कर्ण के कवच और कुंडल मांग लिए जिससे अर्जुन की विजय संभव हुई। अर्जुन भी कुंती को इंद्र की कृपा से ही प्राप्त हुआ था। जब महादेव अर्जुन की परीक्षा हेतु आये तो इंद्र ने ही शूकर का रूप धर अर्जुन को पशुपास्त्र प्राप्त करने में सहायता की। चूंकि इंद्र सम्राट हैं , इसीलिए उनमे राजसी गुण होना सामान्य है। उन्हें कामासक्त बताया जाना भी इसी गुण की प्रधानता दिखलाता है।

कुछ तर्क हमें देखने को मिलते है | जिससे हमे इस पद कि शक्ति का पता चलता है |

  • जब देवी सीता को रावण उठा ले गया था ,तब इंद्र हे थे जो सीता को अशोक वाटिका में जाकर दिव्य खीर खिलते है , जिससे देवी को 1 साल तक भूख नही लगी |

  • श्री राम भक्त हनुमान जी को ही इंद्र देव ने इछामृत्यु का वरदान दिया था |

  • रामयण के युद्ध में श्री राम को अपना रथ सहायता के लिए दिया था |

  • महाराज दशरथ को भी लंका में मिलाने इंद्र ही अपने साथ ले थे |

  • रामायण के युद्ध में जब लक्ष्मण मुर्छित हुए और साँस लेना बंद कर दिया था , तब सह्सरीर इंद्र अपने साथ स्वर्ग ले गये थे |

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