ज्वाला जी की कथा

कथा – जिला होशियारपुर के गोपीपुरा डेरा से लगभग 10 मील पर ज्वाला जी का मंदिर है यहां पहाड़ पर से सदा अग्नि की लपटें निकलती रहती है यह धुआं देवी का स्थान कहलाता है यह पर सती जी की जीभ गिरी थी इसलिए 52 शक्तिपीठों में इसकी मान्यता है |

मुगल बादशाह अकबर ने जब ध्यानु भगत के घोड़े का कटा सिर जुड़ने पर ज्वाला देवी की महत्वता स्वीकार की थी और सवा मन सोने का छत्र लेकर मंदिर में प्रतिष्ठा करनी चाही तो देवी ने प्रकट होकर छत्र के टुकड़े-टुकड़े कर उसे न जाने किस धातु का बना दिया था इस प्रकार देवी ने अकबर के अहंकार को मिटाया वह छत्र आज भी इस स्थान पर टुकड़ों के रूप में सुरक्षित पड़ा है |

ज्वाला जी के मंदिर के पास एक पानी का कुंड है जिसे सूरजकुंड कहते हैं यहीं पर लक्ष्मी देवी का मंदिर अंबेश केश्वर महादेव रघुनाथ जी शीतला भगवान महावीर तारा देवी आदि के अनेक अवतारों की मूर्तियां है जिसका भक्तजन श्रद्धा अनुसार बारी से दर्शन करते हैं यहां के मंदिर व अन्य स्थानों की यात्रा से देवी की कृपा से सब कष्ट दूर होकर मनोकामनाएं पूर्ण होती है |

ध्यानु भगत की कथा

कथा – जिन दिनों भारत में मुगल सम्राट अकबर का शासन था उन्हें दिनों यह घटना है निदान ग्राम निवासी माता का एक सेवक ध्यानू भक्त 1000 यात्रियों सहित माता के दर्शन के लिए जा रहा था(कथा) इतना बड़ा दल देखकर बादशाह के सिपाहियों ने चांदनी चौक दिल्ली में उन्हें रोक लिया और अकबर के दरबार में ले जाकर ध्यानु भगत को पेश किया बादशाह ने पूछा तुम इतने आदमियों को साथ लेकर कहां जा रहे हो ध्यानु ने हाथ जोड़कर उत्तर दिया मैं ज्वाला माई के दर्शन के लिए जा रहा हूं |

ध्यानु भगत की कथा |
ज्वाला जी की कथा

मेरे साथ जो लोग हैं वह भी माता के भक्त हैं और यात्रा पर जा रहे हैं ,अकबर ने यह सुन कर कहा यह ज्वाला माई कौन है और वहां जाने से क्या होगा ध्यान में भक्तों ने उत्तर दिया महाराज ज्वाला माई संसार की रचना एवं पालन करने वाली माता है वह भक्तों के सच्चे हृदय से की गई प्रार्थना स्वीकार करती है(कथा) तथा उसकी मां सब मनोकामनाएं पूर्ण करती है उनका प्रताप ऐसा है कि उनके स्थान पर बिना तेल बत्ती के ज्योत जलती रहती है हम लोग प्रतिवर्ष उनके दर्शन करने जाते हैं |

अकबर बादशाह बोले तुम्हारी ज्वाला माई इतनी ताकतवर है इसका यकीन हमें किस तरह होगा आखिर तुम माता के भक्त हो अगर कोई करिश्मा हमें दिखाओ तो हम ही मान लेंगे ध्यान ओने नम्रता(कथा) से उत्तर दिया श्रीमान मैं तो माता का एक तुच्छ सेवक हूं मैं भला कोई चमत्कार कैसे दिखा सकता हूं अकबर ने कहा अगर तुम्हारी बंदगी पार्क वह सच्ची है तू देवी माता जरूरत रखेगी अगर वह तुम जैसे भक्तों का ख्याल रखें तो फिर तुम्हारी बात का क्या फायदा या फिर वह देव ही यकीन के काबिल नहीं है तुम्हारी इबादत की झूठी है इम्तिहान के लिए हम तुम्हारे घोड़े की गर्दन अलग किए देते हैं |

तुम अपनी देवी से कह कर उसे दोबारा जिंदा करवा लेना इस प्रकार घोड़े की गर्दन काट दी गई ध्यानू भक्त ने कोई उपाय न देख कर बादशाह से 1 माह की अवधि तक घोड़े के सिर धड़ सुरक्षित(कथा) रखने की प्रार्थना की अकबर ने ध्यानू भक्त की बात मान ली यात्रा करने की अनुमति भी मिल गई बादशाह से विदा होकर ध्यानू भक्त अपने साथियों सहित माता के दरबार में उपस्थित हुआ स्नान पूजन आदि करने के उपरांत रात भर जागरण किया प्रातकाल आरती के समय हाथ जोड़कर ध्यानु ने प्रार्थना की हे मातेश्वरी आप अंतर्यामी है |

बादशाह मेरी भक्ति की परीक्षा ले रहा है मेरी लाज रखना मेरे घोड़े को अपनी कृपा व शक्ति से जीवित कर देना चमत्कार प्रकट करना अपने सेवक को कृतार्थ करना यदि आप मेरी प्रार्थना स्वीकार करेंगी तो मैं भी अपना सिर काट कर आपके चरणों में अर्पित कर दूंगा क्योंकि लज्जित(कथा) होकर जीने से मर जाना अधिक अच्छा है यह मेरी प्रतिज्ञा है आप उत्तर दें कुछ समय तक मौन रहा कोई उत्तर नहीं मिला इसके पश्चात भक्तों ने तलवार से अपना शीश काटकर देवी को भेंट कर दिया उसी समय साक्षात ज्वाला माई प्रकट हुई और ध्यानू भक्त का सिर धड़ से जुड़ गया|

भक्त जीवित हो गया माता ने भक्तों से कहा कि दिल्ली में घोड़े का सिर धड़ से जुड़ गया है चिंता छोड़कर दिल्ली पहुंचो लज्जित होने का कारण निवारण हो गया है और जो कुछ इच्छा उबर मांगो ध्यानू भक्त ने माता के चरणों में शीश झुका कर प्रणाम कर निवेदन किया है जगदंबे आप सर्वशक्तिमान है हम मनुष्य अज्ञानी हैं ,भक्ति की विधि भी नहीं जानते फिर भी विनती करता हूं कि जगत माता आप अपने भक्तों को इतनी कठिन परीक्षा ने लिया करें प्रत्येक संसारी भक्त आपको सिर्फ भेंट नहीं दे सकता कृपया करके हैं मातेश्वरी किसी साधारण भेंट से ही आप अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण किया करो |

थास्तु अब मैं शीश के स्थान पर केवल नारियल की भेंट वह सच्चे हृदय से की गई प्रार्थना द्वारा ही मनोकामना पूर्ण करूंगी यह कहकर माता अंतर्ध्यान हो गई इधर तो यह घटना(कथा) घटी उधर दिल्ली में जब मृत घोड़े के सिर धड़ माता की कृपा से अपने आप जुड़ गए तो सब दरबारियों सहित बादशाह अकबर आश्चर्य में डूब गई बादशाह ने कुछ सिपाहियों को जवालाजी भेजा सिपाहियों ने वापस आकर अकबर को सूचना दी वहां जमीन में से रोशनी की लपटें निकल रही है |

Listen to Shiv Katha

शायद उन्हीं की ताकत से यह करिश्मा हुआ अगर आप हुक्म दे तो इन्हें बंद करवा दें इस तरह हिंदुओं की इबादत की जगह ही खत्म हो जाएगी अकबर ने स्वीकृति दे दी शाही सिपाहियों ने सर्वप्रथम माता की पवित्र ज्योति के ऊपर लोहे के मोटे मोटे तवे रखवा दिए परंतु दिव्य ज्योति तवे छोड़कर ऊपर निकल आई इसके पश्चात एक नहर का बहाव उस और छोड़ दिया गया जिससे नहर का पानी निरंतर ज्योति के ऊपर गिर तार है फिर भी ज्योति का जलना बंद नहीं हुआ सही सिपाहियों ने अकबर को सूचना दे दी जोतो का जलना बंद नहीं हो सकता हमारी सारी कोशिशें नाकाम हो गई आप जो मुनासिब हो करें |

इस समाचार को पाकर बादशाह अकबर ने दरबार के विद्वान ब्राह्मणों से परामर्श किया ब्राह्मणों ने विचार करके कहा कि आप स्वयं जाकर देवी चमत्कार देखें तथा नियमानुसार भेंट (कथा) आदि चढ़ाकर देवी माता को प्रसन्न करें बादशाह के लिए दरबार जाने का नियम यह है कि स्वयं अपने कंधे पर सवा मन सोने का छत्र लादकर नंगे पैरों माता के दरबार में जाए तत्पश्चात स्तुति आदि करके माता से समा मांग ले |

अकबर ने ब्राह्मणों की बात मान ली सवा मन सोने का भव्य छत्र अपने कंधे पर रखकर नंगे पैरों बादशाह जवाला जी पहुंचे वहां दिव्य ज्योति के दर्शन किए मस्तक श्रद्धा से झुक गया अपने पर पश्चाताप होने लगा सोने का छत्र कंधे से उतारकर रखने का उपक्रम किया परंतु छात्र गिरकर टूट गया कहा जाता है कि वह सोने का ना रहा किसी विचित्र धातु में बन गया जो ने लोहे का था ने पीतल का ने तांबे का न सीसे |कथा

अर्थात देवी ने भेंट अस्वीकार कर दी इस चमत्कार को देखकर अकबर ने अनेक प्रकार से स्तुति करते हुए कहा माताजी शमा की भीख मांगी और अन्य प्रकार से माता की पूजा करके दिल्ली वापस लौट आया और अपने सिपाहियों के साथ प्रेम पूर्वक व्यवहार किया अकबर बादशाह द्वारा चढ़ाया गया खंडित छत्र माता के दरबार के बाई और आज भी पड़ा हुआ देखा जा सकता है
बोलो सांचे दरबार की जय

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