Himachal pradesh brijraj mandir tourist place and its historical significance | हिमाचल में दुनिया का एकमात्र मंदिर जहां इस भगवान संग विराजते हैं श्री कृष्ण

हिमाचल प्रदेश के नूरपुर में स्थित श्रीकृष्ण का यह मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है। हर साल दुनिया भर से लाखों लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं। आइए जानते हैं क्या है इस मंदिर का इतिहास और क्यों है यह बेहद खास।

हिमाचल में दुनिया का इकलौता मंदिर जहां इस भगवान के साथ रहते हैं श्रीकृष्ण

विश्व का अनूठा मंदिर हिमाचल प्रदेश के नूरपुर में स्थित है

चित्र साभार: Twitter/@kamalmohansood

हिमाचल प्रदेश में कई देवी-देवताओं के मंदिर हैं जिनका इतिहास काफी पुराना है। लेकिन भगवान हिमाचल के नूरपुर के प्राचीन किले के मैदान में स्थित हैं श्री बृजराज स्वामी जी का यह मंदिर बेहद खास है। पूरी दुनिया में यही एक ऐसा मंदिर है जहां श्री कृष्ण की मूर्ति राधा के साथ नहीं बल्कि मीरा बाई के साथ स्थापित है। ये दोनों मूर्तियां इतनी अलौकिक और आकर्षक हैं कि इनके दर्शन मात्र से ही व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी हो जाती है। मूर्तियां ऐसी बनाई जाती हैं जैसे स्वयं भगवान श्री कृष्ण आपके सामने खड़े हों। जन्माष्टमी के दिन इस मंदिर की अलौकिकता और सुंदरता बढ़ जाती है।

मंदिर का इतिहास

यह बात 1629 से 1623 ईस्वी तक की है जब चित्तौड़गढ़ के राजा के निमंत्रण पर नूरपुर के राजा जगत सिंह अपने राज पुरोहित के साथ वहां पहुंचे। महल के बगल में एक मंदिर था जहाँ राजा जगत सिंह और उनके पुजारियों को रात्रि विश्राम के लिए ठहराया गया था। रात में राजा को उस मंदिर से घुंघरू और संगीत की आवाज सुनाई दी। उन्होंने महल की खिड़की से झांक कर देखा तो मंदिर में एक महिला श्रीकृष्ण की मूर्ति के सामने भजन गाती हुई नृत्य कर रही थी। उस मंदिर में श्रीकृष्ण और मीरा की मूर्तियाँ थीं। जब नूरपुर के राजा ने अपने पुजारियों को पूरी बात बताई, तो लौटते समय उन्होंने इन मूर्तियों को उपहार के रूप में माँगा। चित्तौड़गढ़ के राजा ने खुशी-खुशी उन्हें मूर्तियां भेंट कीं। इसके बाद नूरपुर के राजा ने अपने दरबार को एक मंदिर में बदल दिया और इन दोनों मूर्तियों को वहां स्थापित कर दिया।

श्री कृष्ण मंदिर में आते हैं

ऐसा माना जाता है कि भगवान कृष्ण हर रात इस मंदिर में आते हैं। इसलिए इस मंदिर में प्रतिदिन पूजा-अर्चना की जाती है और रात के समय मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं। मंदिर को बंद करने से पहले मूर्तियों के सामने शयन मुद्रा, पैर और पानी से भरा गिलास रखा जाता है। सुबह जब मंदिर का कपाट खोला जाता है तो बिस्तर पर सिलवटें होती हैं और एक गिलास पानी गिरा होता है। मान्यता है कि श्रीकृष्ण और मीराबाई रात्रि में यहीं विश्राम करते हैं।

(यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और लोक मान्यताओं पर आधारित है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसे आम जनहित को ध्यान में रखते हुए यहां प्रस्तुत किया गया है।)

Leave a Reply

error: Content is protected !!