Ganesh ji का मस्तक कटने के बाद उसका क्या हुआ ?

Ganesh ji का मस्तक कटने के बाद उसका क्या हुआ ?

Ganesh ji का मस्तक कटने के बाद उसका क्या हुआ ?

हिंदू धर्म में सर्वप्रथम गणेश जी की पूजा की जाती है गणेश जी को विघ्नहर्ता और शुभ कार्य शुरू करने से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है |गणेश जी को सर्वप्रथम मनाया जाता है गणेश जी की जन्म कथा बड़ी ही अद्भुत है |जैसा कि आप जानते हैं गणेश जी के बारे में दो प्रचलित कथाएं भी है |आज हम जानेंगे  गणेश जी की दो कथाएं |

शिव पुराण के अनुसार मां पार्वती ने अपने सहेली जया और विजया के कहने पर गणेश जी को अपने मेल के द्वारा बनाया और उसके अंदर सांसे डाल दी जिससे गणेश जी प्रकट हो गए और मां पार्वती के पुत्र के रूप में मां पार्वती के पास आ गए ।

मां पार्वती ने गणेश जी को आदेश दिया कि जब तक मैं स्नान करके आती हूं तब तक किसी को भी अंदर मत आने देना और तुम प्रवेश द्वार पर ही पहरा देना इसी बीच जब Ganesh ji प्रवेश द्वार पर पहरा दे रहे थे तब भगवान शिव वहां पर आते है ,और अंदर जाने लगते हैं तब बाल गणेश जी उन्हें रोकने की कोशिश करते हैं और भगवान शिव को अंदर जाने से मना करते हैं भगवान शिव क्रोध में आकर अपने त्रिशूल के द्वारा बालक का सिर धड़ से अलग कर के अंदर चले जाते हैं |

जब मां पार्वती स्नान करके आती हैं तब वह देखती है कि भगवान गणेश अचेत अवस्था में पढ़े हुए हैं तब वह विलाप करने लगती हैं तथा रोने लगती है यह देख कर भगवान शिव मां पार्वती से कारण पूछते हैं तथा वह एक हाथी के बच्चे का सिर लाकर भगवान गणेश को लगा देते हैं और मां पार्वती खुश हो जाती है |

भगवान गणेश के बारे में दूसरी कथा के अनुसार जब Ganesh ji का जन्म हुआ तो पूरे कैलाश में उत्सव मनाया जा रहा था |सभी देवता गण भगवान गणेश को आशीर्वाद देने के लिए कैलाश पर पधारे हुए थे |लेकिन श्री शनिदेव जी अपनी नजरें झुका कर खड़े हुए थे जब सभी देवता गण गणेश जी को आशीर्वाद दे रहे थे |

तब श्री शनिदेव जी अपने नजरें झुका कर खड़े हुए थे तब मां पार्वती जी श्री शनिदेव जी पर दबाव बनाती है और कहती है कि हे शनिदेव जी आप गणेश जी को आशीर्वाद क्यों नहीं दे रहे, तब श्री शनिदेव जी कहते हैं कि हे मां पार्वती अगर मैं श्री गणेश जी को सामने से देखता हूं तो Ganesh ji का सिर धड़ से अलग हो जाएगा |

लेकिन मां पार्वती नहीं मानी और शनि देव जी ने गणेश जी की तरफ देखा तो उनका सिर धड़ से अलग हो गया और श्रीहरि भगवान उसी वक्त जटायु पर बैठकर पुष्प भद्रा नदी के समीप पहुंचे वहां हथिनी अपने बच्चे से मुंह फेर कर सो रही थी तब श्री हरि भगवान ने हथिनी के बच्चे का सिर काट कर ले आए और भगवान गणेश को नया जीवन प्रदान किया |

जब Ganesh ji ने ली पृथ्वी पर इंसानों की परीक्षा

आगे जानते हैं कि भगवान गणेश का असली शिर धड़ से अलग होकर कहां गया । आपने देखा होगा कि भगवान गणेश का कोई भी मंदिर हो अथवा कोई भी चित्रपट हो उसमें गणेश जी को हाथी का सिर लगा होता है लेकिन जहां हम बात करते हैं कि भगवान गणेश का कोई भी ऐसा मंदिर नहीं है जिसमें भगवान गणेश का असली मस्तक लगा हो,

माना जाता है कि उत्तराखंड में पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट से 14 किलोमीटर दूर स्थित है |इस गुफा को पाताल भुवनेश्वर गुफा के नाम से भी जाना जाता है | इसे गुफा के अंदर भगवान गणेश का असली शेर भगवान शिव ने रखा था यही नहीं बल्कि भगवान शिव स्वयं गणेश जी के कटे हुए सिर की रक्षा करते हैं | पाताल भुवनेश्वर गुफा में 33 करोड़ देवी देवता भी विद्यमान है कलयुग में इस गुफा की खोज आदि शंकराचार्य ने की थी और इसके साथ यह भी माना जाता है कि श्री गणेश जी का असली मस्तक चंद्र मंडल में भी स्थापित है पूरे साल में संकट चतुर्थी के तेरह व्रत रखे जाते हैं इन तिथि पर चंद्र दर्शन को अर्ध्य देकर श्री Ganesh ji पूजा की जाती है |
|| कृपया अपना प्यार और आशीर्वाद जरुर दे , और comment में जय श्री गणेश जरुर लिखे ||

ॐ गण गणपतये नमः

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