Ekadashi Vrat Katha (सकट चौथ,जया एकादशी,विजया एकादशी,आमला एकादशी)

 सकट चौथ व्रत कथा

Ekadashi Vrat Katha (सकट चौथ,जया एकादशी,विजया एकादशी,आमला एकादशी)

सकट चौथ का त्यौहार भी माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है इस दिन संकट हरण गणपति गणेश जी का पूजन होता है इस दिन पुत्रवती स्त्रियां दिनभर निर्जल रहकर श्याम को फलाहार करती है तथा सकट माता पर पूरी पकवान चढ़ाती है तथा कथा सुनती है इस दिन तिल को भूनकर गुड़ के साथ कुटा जाता है इससे तिलकुट का पहाड़ बनाया जाता है कहीं-कहीं तिलकुट का बकरा बना कर उसकी पूजा करके घर का कोई बालक उसकी चाकू से गर्दन काटता है

कथा प्रारंभ किसी नगर में एक कुम्हार रहता था एक बार उसके बर्तन पकाने के लिए आवा लगाया तो आवा में बर्तन नहीं पके कुम्हार ने इसकी राजा से फरियाद की राजा ने पंडित को बुलाकर कारण पूछा तो पंडित जी ने कहा कि हर बार हवा लगाते समय बच्चे की बलि देने से आवा पक जाया करेगा राजा का आदेश निकल गया बलि आरंभ हो गई एक बार सकट के दिन एक बुढ़िया के एकमात्र बालक की बारी आई बुढ़िया ने लड़के को सकट की सुपारी तथा धूप का बीड़ा देकर कहा भगवान का नाम लेकर आवा में बैठ जाना सकट माता तुम्हारी रक्षा करेगी बालक भगवान का नाम लेकर आवा में बैठ गया बुढ़िया सकट माता के सामने बैठ कर पूजा करने लगी पहले आवा पकने में कई दिन लगते थे परंतु अब की बार 1 दिन में ही आवा पक गया बुढ़िया का बेटा भी आवे में सुरक्षित निकल गया नगर वासियों ने सकट की महिमा स्वीकार की सकट की कृपा से अन्य बालक भी जी उठे उसी दिन से सकट चौथ का व्रतकिया जाने लगा |

पंचांग के अनुसार 27 फरवरी 2022 दिन रविवार को विजय एकादशी है। विजय एकादशी पारण मुहूर्त: 28 फरवरी को 06:47:56 से 09:06:21 बजे तक है।

जया एकादशी व्रत कथा

Ekadashi Vrat Katha (सकट चौथ,जया एकादशी,विजया एकादशी,आमला एकादशी)

माघ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी कहते हैं

विधान। भगवान श्री कृष्ण की पुष्प, जल ,अक्षत रोली, तथा विशिष्ट पदार्थों से पूजा करनी चाहिए भगवान को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करना चाहिए |

कथा प्रारंभ, प्राचीन काल में इंद्र की सभा में मन्यवान नाम का एक गंधर्व गीत गा रहा था परंतु उसका मन अपनी नवयौवना पत्नी मैं पढ़ा था इस कारण गाते समय उसकी लय ताल बिगड़ गई इंद्र ने कुपित होकर उसे श्राप दे दिया कि तू जिसकी याद में मस्त है वह राक्षसी हो जाए वह अपनी गलती को स्वीकार करते हुए इंद्र से समा मांगते हुए प्रार्थना करने लगा कि अपना श्राप वापस ले ले परंतु इंद्र ने उसे सभा से बाहर निकलवा दिया घर आने पर उसने देखा वास्तव में उसकी पत्नी राक्षसी बन चुकी है शराब के निवारण के लिए उसने अनेक यतन किए परंतु सब निष्फल रहे अचानक एक दिन उसकी भेंट ऋषि नारद से हो गई नारद जी ने उसे श्राप की निवृत्ति के लिए माघ शुक्ल एकादशी का व्रत कथा भगवत कीर्तन की सलाह दी मल्लवान गंधर्व ने एकादशी का व्रत किया जिसके प्रभाव से उसकी पत्नी पिशाच दिन से छूट गई और अति सुंदर देह धारण कर दोनों स्वर्ग लोक को चले गए जो भी जया एकादशी को श्रद्धा पूर्वक करता है वह मनुष्य स्वर्ग की प्राप्ति करता है |

पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का प्रारंभ 11 फरवरी दिन शुक्रवार को दोपहर 01 बजकर 52 मिनट पर हो रहा है, यह तिथि अगले दिन 12 फरवरी को शाम 04 बजकर 27 मिनट तक मान्य है. ऐसे में उदयातिथि 12 फरवरी दिन शनिवार को है, फिर जया एकादशी व्रत 12 फरवरी को रखा जाएगा.

विजया एकादशी व्रत कथा

Ekadashi Vrat Katha (सकट चौथ,जया एकादशी,विजया एकादशी,आमला एकादशी)

विजया एकादशी का व्रत फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है पूजन में धूप दीप नवेद नारियल आदि चढ़ाया जाता है इस दिन भगवान राम लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए समुद्र तट पर पहुंचे थे समुंद्र ने जब श्री राम को मार्ग नहीं दिया तो भगवान श्रीराम ने ऋषियों  से उपाय पूछा ऋषियों ने बताया कि हम प्रत्येक शुभ कार्य को शुरू करने से पहले व्रत आदी का अनुष्ठान करते हैं आप भी फाल्गुन कृष्ण एकादशी का विधिपूर्वक व्रत कीजिए मिट्टी के एक बर्तन में सतनाज  पर स्थापित करो उसके पास पीपल, आम, बड तथा गूलर के पत्ते रखो एक बर्तन जो से भरकर कलश पर स्थापित करो जो के बर्तन में श्री लक्ष्मी नारायण जी की प्रतिमा स्थापित करो तथा विधि पूर्वक पूजन करो रात्रि जागरण के बाद प्रातकाल जल सहित कलश को सागर के निमित्त अर्पित कर दो इस व्रत के प्रभाव से समुंद्र आपको रास्ता भी दे देगा तथा रावण पर विजय भी प्राप्त होगी तभी से इस व्रत का प्रचलन हुआ |

पंचांग के अनुसार 27 फरवरी 2022 दिन रविवार को विजय एकादशी है। विजय एकादशी पारण मुहूर्त: 28 फरवरी को 06:47:56 से 09:06:21 बजे तक है।

आमला एकादशी व्रत कथा 

Ekadashi Vrat Katha (सकट चौथ,जया एकादशी,विजया एकादशी,आमला एकादशी)

आमल की एकादशी फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है आंवले के वृक्ष में भगवान का निवास होता है इसलिए इस दिन को आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भगवान का पूजन किया जाता है प्राचीन काल में भारत में चित्र सेन नाम का राजा हुआ था उनके राज्य में एकादशी का व्रत का प्रचलन था प्रज्ञा एवं राजा एकादशी का व्रत रखते थे 1 दिन राजा चित्रसेन शिकार खेलते खेलते वन में बहुत दूर निकल गए वहां पर जंगली जातियों ने उन पर आक्रमण किया उनके अस्त्रों शस्त्रों का उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा यह देखकर जंगली चकित रह गए देखते देखते जंगली जाति के आदमियों की संख्या बढ़ गई तो उन के आक्रमण से राजा चित्र से यह संज्ञा हीन होकर पृथ्वी पर गिर पड़े पृथ्वी पर गिरते ही राजा के शरीर से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई जो समस्त राक्षसों को मार कर अदृश्य हो गई जब राजा की मूर्छा टूटी तो उन्हें सब राक्षस मृत पड़े दिखाई दिए वह बड़े आश्चर्य में पड़ कर सोचने लगे कि इन्हें किसने मारा है तभी आकाशवाणी हुई यह समस्त राक्षस तुम्हारे आमला एकादशी व्रत के प्रभाव के कारण मारे गए हैं यह सुनकर राजा बहुत प्रसन्न हुआ तथा अपने राज्य में उसने आमला एकादशी के व्रत का प्रचार करवाया उसी  दिन से सभी मनुष्य आमला एकादशी का व्रत श्रद्धा पूर्वक करने लगे तथा अंत में स्वर्ग लोक को सिधार गए |

माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी ति​थि 28 जनवरी दिन शुक्रवार को षटतिला एकादशी है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से जातकों को मोक्ष की प्राप्ति होती है.|


|| जय माता दी || || जय श्री हरी || 

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