Chanakya Niti Why the person who donates is considered best here you should Know | Chanakya Niti: दान करने वाले व्यक्ति को क्यों माना जाता है श्रेष्ठ, जानें

आचार्य चाणक्य एक महान अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ और राजनयिक थे। उसने अपनी नीतियों के आधार पर चंद्रगुप्त को सम्राट बनाया। आइए जानते हैं आचार्य चाणक्य के अनुसार दान का महत्व।

चाणक्य नीति: दान देने वाले को क्यों माना जाता है श्रेष्ठ, जानिए

आचार्य चाणक्य

आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में कई बातों का जिक्र किया है। इन नीतियों का पालन कर व्यक्ति अपने जीवन को सफल बना सकता है। नैतिकता में आचार्य चाणक्य लगभग हर क्षेत्र का जिक्र किया है। इन नीतियों को अपनाकर व्यक्ति जीवन की बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान आसानी से कर सकता है। आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी प्रासंगिक हैं। आज भी युवा जीवन में सफलता पाने के लिए इन नीतियों का पालन करते हैं। नीति शास्त्र में आचार्य चाणक्य ने दान के बारे में भी विस्तार से बताया है। आइए जानते हैं क्यों माना जाता है दानदाता सर्वश्रेष्ठ।

दानें पणिरं तु कंकनेन स्नानेन शुद्धिर्न तु चंदानेन।

मनेन तृप्तिर्न तू भोजनेन ज्ञानेन मुक्तिर्न तू मंदानेन।

इस श्लोक के अनुसार दान करने वाले हाथों की शोभा कंगन पहनने वाले हाथों से अधिक होती है। स्नान करने से शरीर शुद्ध माना जाता है न कि शरीर पर चंदन लगाने से। तृप्ति सम्मान से होती है, अन्न खाने से नहीं, मोक्ष श्रंगार से नहीं ज्ञान से मिलता है। इस श्लोक के अनुसार व्यक्ति को कभी भी दान से विमुख नहीं होना चाहिए। स्वस्थ रहने के लिए स्नान और साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए। व्यक्ति अपने आचरण से सम्मान प्राप्त करता है, जबकि ज्ञान का संग कभी भी व्यक्ति से अलग नहीं होना चाहिए।

नन्नोदकसं दानम् न तितीर्वादशी समा।

न गायत्र्यः पारो मन्त्र न मतुरदैवत परम्।

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इस श्लोक के अनुसार अन्न और जल के दान जैसा कोई कार्य नहीं है। द्वादशी के समान कोई तिथि नहीं है, गायत्री मंत्र के समान कोई मंत्र नहीं है, माता के समान कोई देवता नहीं है, इसलिए मनुष्य को जीवन में सुख पाने के लिए और पुण्य की प्राप्ति के लिए दान अवश्य करना चाहिए। गायत्री मंत्र का नियमित जाप करना चाहिए। इससे न केवल मन को शांति मिलती है बल्कि आपका शरीर भी शुद्ध होता है। भगवान के साथ-साथ अपने माता-पिता का हमेशा सम्मान करें। इससे उनकी कृपा आप पर सदैव बनी रहती है।

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