Chanakya neeti teachings for success of life in hindi | Chanakya Niti: जीवन में सफलता चूमेगी कदम, इन बातों में छिपा है राज

आचार्य चाणक्य ने अपने जीवन में विषम से विषम परिस्थितियों का सामना किया लेकिन कभी हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य को प्राप्त किया। आप भी जीवन में सफलता पाने के लिए उनकी शिक्षाओं का पालन कर सकते हैं।

चाणक्य नीति: जीवन में सफलता आपके कदम चूमेगी, इन बातों में छिपा है राज

चाणक्य नीति

इस दौर में भी आचार्य चाणक्य की नीतियां बेहद सटीक हैं। आचार्य चाणक्य द्वारा कही गई बातों पर भी लोगों की काफी आस्था है। यही वजह है कि लोग आज भी चाणक्य की शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारते हैं। आचार्य चाणक्य एक उत्कृष्ट विद्वान होने के साथ-साथ उन्हें एक अच्छा शिक्षक भी माना जाता है। चाणक्य नीति के अनुसार हर इंसान जीवन में सफलता हासिल करना चाहता है। उनकी यही कामना रहती है कि सुख-समृद्धि, धन-वैभव सदैव बना रहे। आचार्य चाणक्य की नीति के ये श्लोक बहुत महत्वपूर्ण हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में-

सही समय और सही तरीके पर विचार करें

का: काल: कनि मित्राणी को देश: कौ व्यागमौ। कच्छाहन का चा में शक्तिरिति चिन्त्य मुहुरमुहुः॥

आचार्य चाणक्य के अनुसार सही समय, सही मित्र, सही जगह, धन कमाने के सही साधन, धन खर्च करने के सही तरीके और अपने ऊर्जा स्रोत पर ध्यान दें, ये भविष्य में काम आएंगे। तात्पर्य यह है कि आपको सही समय का इंतजार करना चाहिए और उसी के अनुसार हमें अपने जीवन के फैसले लेने चाहिए।

अपने व्यवहार पर ध्यान दें

चाणक्य नीति के अनुसार मनुष्य को अपने व्यवहार में बहुत अधिक भोलापन या सीधापन नहीं दिखाना चाहिए। ध्यान रहे कि जंगल में सीधे पेड़ पहले काटे जाते हैं और जो पेड़ टेढ़े होते हैं वे खड़े रहते हैं। इसलिए जरूरी है कि लोगों को परखा जाए और समय के अनुसार उनके व्यवहार में बदलाव किया जाए।

सही और गलत का न्याय करो

यो ध्रुवाणि परित्यज्य अध्रुवम परिशेवते। ध्रुवनि तस्य नश्यन्ति चध्रुवन नास्तमेव हि ॥

आचार्य चाणक्य के अनुसार जो व्यक्ति निश्चित यानि सही को छोड़कर अनिश्चित यानी गलत का सहारा लेता है उसका अधिकार भी नष्ट हो जाता है। इसलिए जब भी कोई फैसला लें तो सही और गलत की जांच जरूर कर लें। चाणक्य नीति के अनुसार व्यक्ति को अपनी सीमा में रहकर ही काम करना चाहिए। चाणक्य के अनुसार जिस समुद्र को हम इतना गंभीर मानते हैं, वह प्रलय आने पर अपनी मर्यादा भी भूल जाता है। लेकिन श्रेष्ठ व्यक्ति मुसीबतों के पहाड़ को तोड़कर भी मर्यादा का उल्लंघन नहीं करता।

Leave a Reply

error: Content is protected !!