Bajrang Baan Lyrics

Bajrang Baan Lyrics



Bajrang Baan पूजन विधि  

अपने इष्ट कार्य की सिधि के लिए मंगल अथवा शनिवार का दिन चुन ले | हनुमान जी की मूर्ति या चित्र जप करते समय सामने रखे | कुसासन लगा के बैठ जाए | ध्यान रखे स्थान शुद्ध व शांत हो , घर में ना हो सके तो किसी मंदिर में जाकर पाठ कर सकते है  | हनुमान जी के अनुष्ठान में गेहू , चावल, मुंग ,उड़द, व काले तील , इन पांच अनाजो को शुद्ध गंगाजल में धोकर व इन्हें पिस कर एक दिया बना ले | और बत्ती अपनी लम्बाई के बराबर कलावे से बनाए | घी का दीपक जलाए | हनुमान जी को गूगल की धुनी सबसे अधिक पसंद है | इसलिए इसका इस्तेमाल जरुर करे ,सकल्प लेकर ही पाठ शुरू करे |
 

बजरंग बाण दोहा


निश्चय प्रेम प्रतीति ते विनय करें सनमान । 

तेहि के कारज सकल शुभ सिद्ध करैं हनुमान ।।

।। बजरंग बाण चौपाई ।।

जय हनुमंत संत हितकारी ।

सुन लीजै प्रभु अरज हमारी ।।

जन के काज विलंब न कीजै ।

आतुर दोरी महासुख दीजिए ।।

जैसे कूदि सिंधु वहि पारा ।

सुरसा बदन बैठी विस्तारा ।।

आगे जाय लंकिनी रोका ।

मारे हु लात गई सुर लोका ।।

जाय विभीषण को सुख दीन्हा ।

सीता निरखि परम पद लीना ।।

बाग ऊजारि सिंधु मेंह बोरा ।

अति आतुर यम कातर तोरा ।।

अक्षय कुमार मारी संहारा ।

लूम लपेट लंक को जारा ।।

 लाह समान लंक जरि गई ।

जय जय धुनि सुर पुर नभ भई ।।

अब विलंब केहि कारण स्वामी ।

कृपा करहु उर अंतर्यामी ।।

जय जय लखन प्राण के दाता ।

आतुर होई दुख करहु निपाता ।।

जय हनुमान जयती बल सागर ।

सुर समूह समरथ भटनागर ।।

ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले ।

बरही मारू बज्र के किले ।।

ॐ हीं हीं हीं हनुमंत कपीसा ।

ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर शीसा ।।

जय अंजनी कुमार बलवंता ।

शंकर सुवन वीर हनुमंता ।।

बदन कराल काल कुल घालक ।

राम सहाय सदा प्रति पालक ।।

भूत प्रेत पिशाच निशाचर ।

अग्नि बेताल काल मारी मर ।।

इन्हें मारु तोही शपथ राम की ।

राखु नाथ मरजाद नाम की ।।

सत्य होहु हरि सप्थ पाय कै ।

राम दुत धरू मारू धाई के ।।

जय जय जय हनुमंत अगाधा ।

दुख पावत जन केहि अपराधा ।।

पूजा जप तप नेम अचारा ।

नहिं जानत कछु दास तुम्हारा ।।

वन उपवन मग गिरि गृह माहीं ।

तुम्हरे बल हम डरपत नाही ।।

जनक सुता हरिदास कहावो ।

ताकी शपथ विलंब न लावो ।।

जय जय जय ध्वनि होत अकाशा ।

सुमिरत होय दूसह दुखनासा ।।

चरण पकरी कर जोरी मनाओ ।

यहि अवसर अब केहि गोहरावो ।।

उठु उठु चलु तोहि राम दुहाई ।

पाए परों कर जोरि मनाई ।।

ॐ चं चं चं चं चपल चलता ।

ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता ।।

ॐ हं हं हांक देत कपि चंचल ।

ॐ सं सं सहमी पुराने खल दल ।।

अपने जन को तुरत उबारो ।

सुमिरत होय आनंद हमारो ।।

यह बजरंग बाण जेहि मारे ।

ताहि कहौ फिर कौन उबारे ।।

पाठ करै बजरंग बाण की ।

हनुमत रक्षा करै प्राण की ।।

यह बजरंग बाण जो जापे ।

ताशो भूत प्रेत सब कापे ।।

धूप देय जो जपे हमेशा ।

ताके तन नहीं रहे कलेशा ।।

।। दोहा ।।

प्रेम प्रतीतिही कापि भजे सदा धरे और ध्यान ।

तेहि के कारज सकल शुभ सिद्ध करैं हनुमान ।।

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Bajrang Baan पाठ करने के फायदे

  • यह पाठ आपको शत्रु व विरोधियो से बचाता है |
  • यह पाठ करने से अताम्विश्वास और साहस बढ़ाता है |
  • हृदय व ब्लड प्रेशर रोगी को यह पाठ से विशेष लाभ मिलता है |
  • कमजोर या डरपोक बच्चो को बजरंग बाण का पाठ करवाना चाइये |
  • अगर हमारे हर कार्य में अडचने बार बार आती है , तो शनिवार को 21 बार बजरंग बाण का पाठ करना चाइये |

|| जय श्री राम || 

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