Astrology How to Make Rajyog In Your Kundali Know Kundli Me Rajyog Kab Banta Hai | Astrology: जिनकी कुंडली में बनता है इस तरह का राजयोग, जीवन में मिलते हैं ये लाभ

राजयोग का अर्थ है कि व्यक्ति राजा के समान सभी प्रकार की सुख-सुविधाओं को प्राप्त करता है। आइए जानते हैं कुंडली में कैसे बनता है राजयोग, जिससे व्यक्ति का जीवन सुख-सुविधाओं में व्यतीत होता है।

ज्योतिष शास्त्र: जिनकी कुंडली में इस प्रकार का राजयोग बनता है, उन्हें जीवन में ये लाभ मिलते हैं

जिनकी कुण्डली में इस प्रकार का राजयोग बनता है, जीवन में ये लाभ मिलते हैं

छवि क्रेडिट स्रोत: फाइल फोटो

वैदिक ज्योतिष गणना के अनुसार कुंडली में नवम और दशम भाव को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। जन्म कुण्डली में कुल 12 भाव होते हैं, जिनमें नवम स्थान को भाग्य और दशम भाव को कर्म कहा जाता है। जिसकी कुण्डली में इन दोनों स्थानों पर शुभ ग्रहों की युति हो तो जातक जीवन के सभी सुखों को भोगता है। कुंडली के कर्म भाव इंसान के काम का पता चल जाता है जिससे उसकी किस्मत का फैसला होता है।

अच्छे कर्म करने से सौभाग्य का साथ मिलता है, जिससे जीवन में हमेशा सफलता मिलती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि जन्म कुण्डली के नवम और दशम भाव में शुभ ग्रह स्थित हों तो व्यक्ति की कुण्डली को राजयोग कुण्डली माना जाता है. राजयोग का अर्थ है कि व्यक्ति राजा के समान सभी प्रकार की सुख-सुविधाओं को प्राप्त करता है।

जिन जातकों की कुंडली में राज योग बनता है, वे अपने जीवन में अपार सफलता, धन, सम्मान और उच्च पद प्राप्त करते हैं। कुण्डली में राजयोग बनने पर व्यक्ति राजनीतिज्ञ, प्रशासनिक अधिकारी, धनवान और कला के क्षेत्र में अच्छा नाम कमाता है। राजयोग तब बनता है जब जातक की लग्न कुंडली में शुभ ग्रह स्थित होते हैं। आइए जानते हैं कुंडली में कैसे बनता है राजयोग, जिससे व्यक्ति का जीवन सुख-सुविधाओं में व्यतीत होता है।

मेष लग्न- मेष लग्न की कुण्डली में यदि मंगल और गुरु कुण्डली के 9वें और 10वें भाव में हों तो यहां राजयोग बनता है.

वृष लग्न- जिन जातकों की कुण्डली में वृष लग्न है और उसमें शुक्र और शनि 9वें और 10वें स्थान पर हैं. शुक्र और शनि की यह युति व्यक्ति को राजा तुल्य सुख-सुविधाएं प्रदान करती है। इसमें शनि द्वारा बनने वाला राजयोग बहुत ही महत्वपूर्ण कारक माना जाता है।

मिथुन लग्न- मिथुन लग्न की कुण्डली में नवम व दशम भाव में बुध व शनि विराजमान हों तो ऐसी कुण्डली वाला जातक राजा की तरह जीवन व्यतीत करता है.

कर्क लग्न- कर्क लग्न की कुण्डली में यदि चन्द्रमा और बृहस्पति नवम और दशम भाव में हों तो इस प्रकार का योग त्रिकोण राजयोग बनता है. इस प्रकार की कुंडली में बनने वाले राजयोग व्यक्ति को मान-सम्मान और यश देते हैं।

सिंह लग्न- सिंह लग्न की कुण्डली में यदि सूर्य और मंगल नवम और दशम भाव में हों तो राज योग कारक योग बनता है.

कन्या लग्न- जब कन्या लग्न की कुंडली में बुध और शुक्र एक साथ भाग्य और कार्य भाव में आते हैं तो जातक को जीवन में राजयोग का सुख प्राप्त होता है।

तुला लग्न- जिन जातकों की तुला लग्न की कुंडली में शुक्र और बुध नवम और दशम भाव में विराजमान होते हैं तो जातक को भाग्य का पूरा सहयोग प्राप्त होता है। यह राजयोग व्यक्ति को सभी प्रकार के सुख, सुविधा और समृद्धि प्रदान करता है।

वृश्चिक लग्न- जब वृश्चिक लग्न की कुण्डली में सूर्य और मंगल नवम भाव और दशम भाव में एक साथ बैठते हैं तो ऐसी कुण्डली को राजयोग बनाने वाली कुण्डली कहते हैं। इस प्रकार की कुंडली के जातक राजा की तरह रहते हैं।

धनु लग्न- धनु लग्न की कुण्डली में नवम और दशम भाव में सूर्य और गुरु की स्थिति राजयोग का कारण बनती है। व्यक्ति अच्छा जीवन व्यतीत करता है, उसके पास अपार धन और सुख-शांति होती है।

मकर लग्न- मकर लग्न की कुण्डली में बुध और शनि की युति 9वें और 10वें भाव में बनती है तो इसे राजयोग कुण्डली कहते हैं.

कुम्भ लग्न- कुम्भ लग्न की कुण्डली में जब शुक्र और शनि एक साथ 9वें या 10वें भाव में बैठते हैं तो राजयोग बनता है. जिसमें जातक राजा की तरह रहता है।

मीन लग्न- वहीं जब मीन लग्न की कुंडली में बृहस्पति और मंगल 9वें और 10वें स्थान में आते हैं तो यह राजयोग कुंडली होती है।

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