Aditya Hridaya Stotra in Hindi

Aditya Hridaya Stotra in Hindi


Aditya Hridaya Stotra(आदित्य हृदय स्तोत्र )पाठ क्या है |

यह पाठ भगवान सूर्यदेव की प्रार्थना है । जो राम और रावण के साथ महायुद्ध से पहले सुनाई गई थी । इस प्रार्थना को महर्षि ऋषि अगस्त्य द्वारा सुनाई गई थी । 

Aditya Hridaya Stotra(आदित्य हृदय स्तोत्र) पाठ कब करे |

  • यह पूजन तब है ,जब आपकी राशि जन्म कुंडली में सूर्य ग्रहण लगा हो इस परिस्थिति में आपको अच्छे परिणाम के लिए नियमित रूप से कर्मकांड करने होंगे । 
  • आदित्य हृदय स्त्रोत मन की शांति आत्मविश्वास और समृद्धि देता है 
  • इस प्रार्थना के पाठ से जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती है 
  • आदित्य ह्रदय स्त्रोत पूजा विधि से अनगिनत लाभ होते हैं जिसके लिए आदित्य हृदय स्त्रोत कि जब पूजा पाठ हवन और व्रत रखे जाते हैं ।
  • आदित्य ह्रदय स्त्रोत के पाठ से नोकरी में पदोन्नति , धन लाभ व सफलता अवश्य मिलती है |

Aditya Hridaya Stotra(आदित्य हृदय स्तोत्र) संपूर्ण पाठ हिंदी अनुवाद

उधर श्री रामचंद्र जी युद्ध से थक कर चिंता करते हुए रणभूमि में खड़े हुए थे |इतने में रावण भी युद्ध के लिए उनके सामने उपस्थित हो गया यह देख भगवान अगस्त्यमुनि जो देवताओं के साथ युद्ध देखने के लिए आए थे ,श्री राम के पास जाकर बोले सबके हृदय में रमण करने वाले महा भाव राम यह सनातन गोपनीय स्त्रोत सुनो ,बस इसके जप से तुम युद्ध में अपने समस्त शत्रुओं पर विजय पा जाओगे, इस गोपनीय स्त्रोत का नाम है ,आदित्य हृदय | यह परम पवित्र और संपूर्ण शत्रुओं का नाश करने वाला है |इसके जप से सदा विजय की प्राप्ति होती है |यह नित्य अक्षय और परम कल्याण में स्त्रोत है ।


संपूर्ण मंगलो का भी मंगल है | इससे सब पापों का नाश हो जाता है | यह चिंता और शोक को मिटाने तथा आयु को बढ़ाने वाला उत्तम साधन है |भगवान सूर्य अपनी अनंत किरणों से सुशोभित है | यह नित्य उदय होने वाले देवता और असुरों से नम स्कृत विवस्वान नाम से प्रसिद्ध प्रभा का विस्तार करने वाले और संसार के स्वामी हैं |तुम इनका रश्मिमते नमः ,समुंद्रते नमः ,देवासुर नमस्कृत्य नमः , विवस्वते नमः ,भास्कराय नमः ,भुवनेश्वर आए नमः इन मंत्रों के नाम द्वारा पूजन करो ।


संपूर्ण देवता इन्हीं के स्वरूप है | यह तेज की राशि तथा अपनी किरणों से जगत को सत्ता एवं स्फूर्ति प्रदान करने वाले हैं |यह अपनी रचनाओं का प्रचार कर के देवता और असुरों सहित समस्त लोगों का पालन करने वाले हैं ।भगवान सूर्य ब्रह्मा , विष्णु  ,शिव ,स्कंद ,प्रजापति महेंद्र कुबेर काल एवं एवं वरुण आदि में भी प्रचलित है ।

यही ब्रह्मा ,विष्णु , शिव ,स्कंद, प्रजापति, इंद्र, कुबेर, काल ,यम ,चंद्रमा ,वरुण ,पितर ,वसु साध्य ,अश्वनी कुमार मुरूदगन ,मनु ,वायु ,अग्नि प्रजा ,प्राण ,रितु को प्रकट करने वाले तथा प्रकाश के पुंज है ।

इनके नाम हैं आदित्य ( अदिति पुत्र ) ,सविता (जगत को उत्पन्न करने वाले ),सूर्य सर्वव्यापक( खग पूछा पोषण करने वाले), गतिमान प्रकाशमान स्वर्ण सदस्य है | भानु प्रकाश अभिनेता ब्रह्मांड की उत्पत्ति के बीच दिवाकर रात्रि के अंधकार दूर करने वाले दिन को प्रकाश फैलाने वाले ।

व्योम नाथ आकाश के स्वामी संवेदी रिव्यू और सामवेद के आगामी धन वृष्टि अपाबित्र जल को उत्पन्न करने वाले विधि है ,विधि पल मगम आकाश में तीव्र वेग से चलने वाले ।

आतापी मंडली ,मृत्यु पिंगल ,भूरे रंग वाले ,सर्वात अपन सब को ताप देने वाले कवि विश्व महा तेजस्वी रक्त सर्व भोग्य शब्द की उत्पत्ति के कारण नक्षत्र ग्रह और तारों के स्वामी विश्वभावन जगत की रक्षा करने वाले तेजस्वीओं से भी अति तेजस्वी और द्वादश सातवा इन सभी नामों से प्रसिद्ध सूर्य देव आपको नमस्कार है।

पूर्व गिरी उदयाचल तथा पश्चिम गिरी अस्ताचल के रूप में आपको नमस्कार है | ज्योतिर गणों ग्रहों और तारों के स्वामी तथा भिन्न के अधिपति आपको प्रणाम है।

आप जय स्वरूप तथा विजय और कल्याण के दाता हैं | आप के रथ में हरे रंग के घोड़े जूते रहते हैं | आपको बारंबार नमस्कार है सहस्त्र किरणों से सुशोभित भगवान सूर्य आपको बारंबार प्रणाम है |आप अदिति के पुत्र होने के कारण आदित्य नाम से भी प्रसिद्ध है ,आपको नमस्कार है।

उग्र वीर और सारंग सूर्य देव को नमस्कार है |कमलो को विकसित करने वाले प्रचंड तेज धारी मार्तंड को प्रणाम है | आप ब्रह्मा शिव और विष्णु के भी स्वामी हैं |सूर आप की संज्ञा है ,यह सूर्य मंडल आपका ही तेज है |

आप प्रकाश से परिपूर्ण हैं ,आप को स्वाहा कर देने वाली अग्नि आपका ही स्वरूप है |आप रौद्र रूप धारण करने वाले हैं |आपको नमस्कार है  |

आप अज्ञान और अंधकार के नाशक जड़ता एवं सीट के निवारक तथा शत्रु का नाश करने वाले हैं |आप का स्वरूप अप्रेम्ये है आपको का नाश करने वाले संपूर्ण ज्योतिष के स्वामी और देव स्वरूप हैं ,आपको नमस्कार है |

आपकी प्रभात आप आए हुए स्वर्ण के समान है ,आप हरी और विश्वकर्मा है |तमकी नाशक प्रकाश स्वरूप और जगत के साक्षी है ,आपको नमस्कार है |

रघुनंदन यह भगवान सूर्य ही संपूर्ण भूतों का संघार सृष्टि और पालन करते हैं |यह अपनी किरणों से गर्मी पहुंचाते हैं और वर्षा करते हैं यह सब भूतों में अंतर्यामी रूप से स्थित होकर उनके सो जाने पर भी जागते रहते हैं यही अग्निहोत्र तथा अग्निहोत्री पुरुषों को मिलने वाले फल है |

वेद यज्ञ और लोगों के फल भी यही है संपूर्ण लो को में जितनी भी क्रियाए होते हैं |उन सब का फल देने में यही पूर्ण समर्थ है राघव विपत्ति में कष्ट में दुर्गम मार्ग में तथा और किसी भय के अवसर पर जो कोई पुरुष इन सूर्य देव का कीर्तन करता है उसे दुख भोगना नहीं पड़ता |

इसलिए तुम एकाग्र चित्त होकर इन देवाधिदेव जगदीश्वर की पूजा करो इस ,आदित्य हृदय का 3 बार जप करने से तुम युद्ध में विजय पाओगे महाबाहो तुम इसी क्षण रावण का वध कर सकोगे यह कहकर अगस्त से जी जैसे आए थे वैसे ही चले गए |

उनका उपदेश सुनकर महा तेजस्वी श्री रामचंद्र जी का शोक दूर हो गया उन्होंने प्रश्न होकर शुद्ध चित्त से आदित्य हृदय को धारण किया और तीन बार आचमन करके शुद्ध हो भगवान सूर्य की ओर देखते हुए इसका तीन बार जब किया इससे उन्हें बड़ा हर्ष हुआ फिर परम पराक्रमी रघुनाथ जी ने धनुष उठाकर रावण की ओर देखा और उत्साह पूर्वक विजय पाने के लिए आगे बढ़े उन्होंने पूरा प्रयत्न करके रावण के वध का निश्चय किया |

उस समय देवताओं के मध्य में खड़े हुए भगवान सूर्य ने प्रसन्न होकर श्री रामचंद्र की ओर देखा और निशाचर आज रावण के विनाश का समय निकट जानकर हर्ष पूर्वक कहा रघुनंदन अब जल्दी करो |

इस प्रकार भगवान सूर्य की प्रशंसा में कहा गया और वाल्मीकि रामायण के युद्ध कांड में वर्णित यह आदित्य हृदयम मंत्र संपन्न होता है ।

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