7 बिंदुओं में समझें राहु से जुड़े इस रत्न को धारण करने के फायदे

डोमेन्स

गोमेद रत्न को कभी भी पुखराज के साथ धारण नहीं करना चाहिए।
गोमेद रत्न धारण करने से व्यक्ति की आस्था में विश्वास होता है।

रत्न लाभ : कुंडली में नौ योजनाओं के कमजोर होने की स्थिति में ज्योतिषी अक्सर जातकों को धारण करने की सलाह देते हैं, लेकिन रत्न अपना सकारात्मक प्रभाव तभी दिखाता है, जब वह नियम के अनुसार धारण किया जाता है। कई बार गलत तरीके से रत्न धारण करने से इसका नकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिलता है। रत्न शास्त्र में नौ ही रत्नों को प्रमुख माना जाता है। यह रत्न माणिक, मोती, मूंगा, पन्ना, पुखराज, हीरा, नीलम, गोमेद और लहसुनिया हैं। इन सभी रत्नों का अपने जातकों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है। किसी भी रत्न को धारण करने से पहले किसी विद्वान ज्योतिष की सलाह लेना बहुत जरूरी होता है। इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपालवासी ज्योतिष एवं पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा।

गोमेद रत्न और इसके फायदे

1. गोमेद एक बहुत ही खूबसूरत रत्न है। ज्योतिष शास्त्र में निहित है कि राहु एक पापी ग्रह है। राहु के प्रभाव को खत्म करने के लिए या राहु के दर्द को कुछ हद तक शांत करने के लिए गोमेद रत्न को धारण किया जा सकता है।

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2. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गोमेद रत्न को धारण करने से व्यक्ति के रुके हुए कार्य पूर्ण होते हैं, और आने वाले कार्यों में भी किसी प्रकार की आय नहीं होती है।

3. गोमेद रत्न करने से राहु की महादशा से भी छुटकारा मिलता है। इसके अलावा गोमेद रत्न धारण करने से व्यक्ति की सुंदरता भी बढ़ती है।

4. गोमेद रत्न धारण करने से व्यक्ति की धारणा में वृद्धि होती है। साथ ही शरीर में सकारात्मक ऊर्जा भी बढ़ती है।

5. गोमेद रत्न को कभी भी 6 रत्ती से कम का धारण नहीं करना चाहिए। मान्यता के अनुसार, यह रत्न धारण करने से आंख, जोड़ों के दर्द जैसी बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है।

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6. इसके अलावा इस रत्न को कभी भी पुखराज के साथ धारण नहीं करना चाहिए।

7. यदि आप गोमेद रत्न धारण करते जा रहे हैं तो इससे पहले इस रत्न को दूध, गंगाजल, शहद और मिश्री के धुंध में गिनते हुए रात भर रहना। इसके बाद अगले दिन इसे अपनी कनिष्का अंगुली में धारण करें। यह सब कुछ उसी दिन अपना प्रभाव डालना शुरू कर देता है।

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