माँ Navdurga जी का आठ्वा रूप – माँ महागौरी

माँ Navdurga जी का आठ्वा रूप – माँ महागौरी


माँ Navdurga जी का आठ्वा रूप – माँ महागौरी

Navdurga हिन्दू पन्थ में माता दुर्गा ,अथवा पार्वती के नौ रूपों को एक साथ कहा जाता है। इन नवों दुर्गा को पापों की विनाशिनी कहा जाता है | दुर्गा सप्तशती ग्रन्थ के अन्तर्गत देवी कवच स्तोत्र में निम्नांकित श्लोक में Navdurga के नाम दिये गए हैं |

|| श्लोक|| Navdurga मंत्र

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।

तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ।।

पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।

सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम् ।।

नवमं सिद्धिदात्री च Navdurga: प्रकीर्तिता:।

उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना ।।

माँ दुर्गा के 9 रूप होते है | इन्हें नो रूपों को Navdurga के नाम से जाना जाता है |

मां दुर्गा जी की आठवे रूप का  नाम महागौरी है | इनका वर्ण पूरी तरह गौरा है | यह गौर देवी को उपमा शंख ,चंद्र और कुंदन के फूल से प्राप्त हुई  है , अथवा इन्ही से दी गयी है | इनकी आयु 8 वर्ष की मानी गई है |

इनके समस्त वस्त्र एवं आभूषण आदि भी श्वेत है | इनकी चार भुजाएं हैं, इनका वाहन वृषभ है  | इनके ऊपर के दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल है | ऊपर वाले बाएं हाथ में डमरु और नीचे के बाएं हाथ में वर मुद्रा है  | इनकी मुद्रा अत्यंत शांत है  | आपने पार्वती रूप में इन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए बड़े कठोर तपस्या की थी | 

इनकी प्रतिज्ञा थी गोस्वामी तुलसीदास जी के अनुसार भी इन्होंने भगवान शिव के वर्णन के लिए कठोर संकल्प लिया था | जन्म कोटि लगी अगर हमारी वर्णों शंभूनाथ रहूं कुंवारी |

इस कठोर तपस्या के कारण इनका शरीर काला पड़ गया था | हिना की तपस्या से प्रसन्न और संतुष्ट होकर जब भगवान शिव ने इनके शरीर को गंगाजी के पवित्र जल से मल कर दो दीया तब वह विद्युत प्रभाव के समान अत्यंत कांति मान गौरव था |

तभी से इनका नाम महागौरी पड़ा दुर्गापूजा के आठवें दिन महागौरी की उपासना का विधान है  | इनकी शक्ति अमोघ और फल दायिनी है , इनकी उपासना से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं | उसके पूर्व संचित पाप भी नष्ट हो जाते हैं | भविष्य में पाप संताप देने दुख उसके पास कभी नहीं आते वह सभी प्रकार से पवित्र और अक्षय पुण्य का अधिकारी हो जाता है | 

माँ महागौरी का ध्यान सम्राट पूजन आराधना भक्तों के लिए सर्व विधि कल्याणकारी है | हमें सदैव इनका ध्यान करना चाहिए | इनकी कृपा से अलौकिक सिद्धियों की प्राप्ति होती है  |मन को अन्य भाव से एक निष्ठ कर मनुष्य को सदैव इनके ही पदारविंदं ओ का ध्यान करना चाहिए | यह भक्तों का कष्ट अवश्य ही दूर करती है इनकी उपासना से आठ जनों से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं  | 

अंतिम तक इनकी चरणों की शरण पाने के लिए हमें सर्वाधिक प्रयत्न करना चाहिए पुराणों में इनकी महिमा का परचूर आख्यान किया गया है यह मनुष्य की वृत्तियों को शत की ओर प्रेरित करके असत्य का विनाश करती है ,हमें प्रेरित भाव से सदैव इनकी शरण में रहना चाहिए |

|| जय माता दी ||


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