हस्तरेखा शास्त्र: किसी व्यक्ति को नेता बना सकता है हाथ का गुरु पर्वत, इस तरह फल देता है

हस्तरेखा शास्त्र: किसी व्यक्ति को नेता बना सकता है हाथ का गुरु पर्वत, इस तरह फल देता है

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गुरु पर्वत की हवेली पर दासी का प्रतीक नहीं माना जाता है।
गुरु पर्वत का सामान्य होना किसी व्यक्ति में नेतृत्व के गुण की निशानी है।

गुरु पर्वत: हस्तरेखा शास्त्र में अंगुलियों के अलावा हस्‍तरेखा शास्त्र में हाथ के निशान वाले चिह्नों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। इन पर्वतों की उंचाई और ऐसी ही संबद्धता वाले अंगुलियों के आकार के आधार पर किसी व्यक्ति के चरित्र और भाग्य के बारे में पता लगाया जाता है। इनमें से एक गुरु पर्वत है, जो लुकी उंगली के नीचे स्थित है। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार गुरु पर्वत व्यक्ति की बुद्धि, चतुराई, महत्वाकांक्षा, व्यवहार व भविष्य का संकेत देता है। इस पहाड़ के झोंपड़े पर गुलामी नहीं है और सामान्य योग्यता नेतृत्व की निशानी है। आइए इस पवर्त के शुभ व अशुभ सावन पर चर्चा करते हैं।

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गुरु पर्वत व व्यक्तित्व का चरित्र
पंडित रामचंद्र जोशी के अनुसार, गुरु पर्वत के महत्व व फल को इस तरह समझा जा सकता है:
1. हाथ में गुरु पर्वत का नहीं होना महत्वाकांक्षाहीन व दासता के जीवन का संकेत होता है। ऐसे व्यक्तियों में नेतृत्व क्षमता नहीं होती, जबकि विकसित गुरु पर्वत उचित महत्वाकांक्षा, स्वाभिमान, आत्मगरिमा, भिन्न वप्रियता का प्रतीक है।

ऐसे लोगों में नेतृत्व और संचालन की सहज प्रवृत्ति होती है। उन्हें समाज में अच्छा महत्व मिलता है। वे दृष्टि- मननशील, विशाल ह्रदय वाले, दया और दूसरों का बुरा सोचने वाले होते हैं। उनके कार्य व व्यवहार दोनों में आदर्श दृष्टि है। महापुरुष गुरु प्रधान ही करते हैं।

2. यदि गुरु पर्वत के पास मानस रेखा अर्थात गुरु पर्वत व जीवन रेखा के बीच स्पष्ट रेखा है तो गुरु पर्वत की भिन्नता और वृद्धि होती है। यदि वह कटी-फटी और अस्त-व्यस्त है तो जातक के स्वभाव में अहंकार और कामना बढ़ती है।

3. गुरु पर्वत अत्यधिक विकसित हो तो किसी भी व्यक्ति में शेख, प्रभुता की भावना, स्वार्थ और दुर्गुण के दुर्गुण आ जाते हैं।

4. सामान्य रूप से विकसित गुरु सफलता प्राप्ति का संकेत है। यदि आपके घर पर मानसिक दुनिया की प्रधानता हो तो किसी व्यक्ति का महत्वाकांक्षा साहित्य क्षेत्र में होती है। यदि उसका व्यवहारिक विश्व प्रीमियर हो तो वह पेशेवर और आर्थिक क्षेत्र में नेतृत्व करता है।

5. यदि गुरु पर्वत का विचरण की ओर हो तो व्यक्ति के स्वभाव में ग्राह्यता होती है। दर्शनशास्त्र, पुरातत्त्ववेत्ता और निश्चित विज्ञान उन्हें आकर्षित करते हैं।

6. यदि पर्वत हृदय की रेखा को अपनी और खींच रहा हो तो ऐसे व्यक्ति प्रेम और यौन संबंध को लेकर आदर्शों से संचालित होते हैं। अपने साथी का चुनाव भी ये बहुत सावधानी से करते हैं।

7. यदि गुरु की अंगुली तर्जनी लंबी हो तो व्यक्ति निरंकुश होता है। वह अपने परिवेश पर आतंकपूर्ण तरीके से शासन करना चाहता है। यदि अंगुली का छोटा हो तो गुरु के सहज गुण समाप्त हो जाते हैं।

8. टेढ़ी-मेढ़ी स्वभाव में चालाकी और नीचता है। यदि अंगुलियों का सिरा कोनिक हो तो व्यक्ति आदर्श प्रिय, वर्गाकार हो तो सामान्य और यदि फैलाया गया हो तो अनावश्यक रूप से महत्वहीन हो जाता है।

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9. धनु की गुरु यात्रा, विवेक और विचारधारा से संबंधित होता है, जबकि मीन का गुरु व्यक्ति को आत्मिक निष्कर्ष देता है।

10. गुरु पहाड़ पर चढ़ता हुआ तारा, त्रिकोण या त्रिशूल का निशान प्रबंधक और आंख का निशान, दाग का निशान या निशान हो तो वह अशुभ व कमजोर नेतृत्व क्षमता का प्रतीक है।

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