समुंद्र-मंथन और Bhagwan Vishnu का मोहिनी अवतार

समुंद्र-मंथन और Bhagwan Vishnu का मोहिनी अवतार


समुंद्र-मंथन और Bhagwan Vishnu का मोहिनी अवतार

मोहिनी जो की नाम से ही ज्ञात हो जाता है मन को मोहने वाली |
यह एक अवतार है जो की Bhagwan Vishnu ने स्वयं सृष्टी की रक्षा के लिए लिया था |
यह रूप केवल राक्षश गण को ही नही हमारे प्रभु भोलेनाथ को भी मोहित करने वाला था |
जब असुरो को समुंदर मंथन से निकला अमृत मिल गया तो
सभी देव चिंता म पड गये की, यह अमृत अगर असुरो ने पी लिया तो यह अमर हो जाएँगे |
जिससे सारी सृष्टी को बहुत बड़ा खतरा था | तब सभी देव Bhagwan Vishnu के पास गये और
उनसे हाथ जोड़ कर प्रार्थना की , हे प्रभु कृपा ऐसा हमे ऐसे मुस्किल से बचाए |
तब Bhagwan Vishnu ने मोहिनी अवतार लिया |
Bhagwan Vishnu मोहिनी अवतार और भस्मासुर वध
मोहिनी अवतार और भस्मासुर की यह एक ऐसी कथा है जिससे आप ही है सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि वह अवतार कितना मनमोहक रहा होगा ।
पौराणिक कथाओं के अनुसार भस्मासुर एक असुर था | जिसे यह वरदान था कि वह जिस पर भी अपना हाथ रखेगा वह भस्म हो जाएगा । इस कथा के अनुसार जब भस्मासुर को अपनी शक्तियों पर घमंड हो गया था , तो वह इसका गलत इस्तेमाल करने चल पड़ा ।
यही नहीं वह स्वय भगवान शंकर को भस्म करना चाहता था । तब भगवान शिव की रक्षा करने के लिए Bhagwan Vishnu ने मोहिनी अवतार धारण किया। इस अवतार से भस्मासुर को आकर्षित किया और नृत्य करने के लिए प्रेरित किया । नृत्य करते हुए भस्मासुर इतना मोहित था ,कि वह Bhagwan Vishnu की तरह ही नृत्य करने लगा ।
इसी का इंतजार Bhagwan Vishnu कर रहे थे और उचित मौका देखकर उन्होंने अपने सिर पर हाथ रखा जिस की नकल कर भस्मासुर ने भी अपना हाथ अपने सर पर रखा और वह अपने ही वरदान से भस्म हो गया ।
अग्नि-पुराण में Bhagwan Vishnu द्वारा लिया गया मोहिनी अवतार का विस्तृत वर्णन है |
अगर हम और इस बारे में जानना चाहते हैं तो अग्नि पुराण का बहुत महत्व है । पौराणिक साहित्य में अग्नि पुराण न केवल ज्ञान का भंडार है बल्कि अपनी व्यापक देखने की शक्ति की वजह से एक विशिष्ट स्थान रखता है ।
अग्नि पुराण को भारतीय संस्कृति का विश्वकोश भी कहा गया है अग्नि पुराण में त्रिदेव ब्रह्मा विष्णु एवं शिव की पूजा उपासना का विस्तृत वर्णन किया गया है। यह ही नहीं इस पुराण में महाभारत और रामायण की भी एक संक्षिप्त कथा भी बताई गई है । अग्नि पुराण के वक्ता स्वयं भगवान अग्निदेव है इसलिए यह अग्नि पुराण कहलाता है ।
अग्नि पुराण के अनुसार इसमें लगभग सभी कथाओं का वर्णन है |अग्निदेव ने अपने श्रीमुख से वर्णित किया है| इसलिए बहुत प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण पुरान है ।
अग्निदेव ने स्वयं इस पुराण को महर्षि वशिष्ठ को सुनाया था ।इस पुराण को दो भागों में बांटा गया है ।
इस पुराण में Bhagwan Vishnu के 10 अवतारों का वर्णन बहुत ही खूब से किया गया है ।
इसके साथ भगवान शिव तथा विष्णु की पूजा किस प्रकार से की जानी चाहिए तथा सूर्य पूजा किस प्रकार से की जानी चाहिए इसका विस्तृत उल्लेख किया गया है ।
नरसिंह मंत्र की जानकारी भी इस पुराण में विस्तृत दी गई है।
इसके साथ-साथ इस पुराण में देवालय निर्माण प्रसाद ,मूर्ति प्रतिष्ठा आदि की विधि बताई गई है। इस पुराण में भूगोल ज्योतिष शास्त्र तथा वैदिक के विवरण के बाद राजनीति का भी वर्णन किया गया है जिसमें अभिषेक संपत्ति सेवक दुर्ग राजधर्म आदि आवश्यक विषय को भी जोड़ा गया है ।
धनुर्वेद का भी बहुत ही ज्ञानवर्धक विवरण दिया गया है जिसमें प्राचीन अस्त्र-शस्त्र सैनिक शिक्षा पद्धति का विवेचन प्रमाणित है। यह ही नहीं आयुर्वेद का भी एक बहुत विशिष्ट वर्णन इसके अनेक अध्यायों में देखने को मिलता है।

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