माँ Navdurga जी का सातवा रूप – माँ कालरात्रि

माँ Navdurga जी का सातवा रूप – माँ कालरात्रि

 

माँ Navdurga जी का सातवा रूप – माँ कालरात्रि

Navdurga हिन्दू पन्थ में माता दुर्गा ,अथवा पार्वती के नौ रूपों को एक साथ कहा जाता है। इन नवों दुर्गा को पापों की विनाशिनी कहा जाता है | दुर्गा सप्तशती ग्रन्थ के अन्तर्गत देवी कवच स्तोत्र में निम्नांकित श्लोक में Navdurga के नाम दिये गए हैं |

|| श्लोक|| Navdurga मंत्र

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।

तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ।।

पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।

सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम् ।।

नवमं सिद्धिदात्री च Navdurga: प्रकीर्तिता:।

उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना ।।

माँ दुर्गा के 9 रूप होते है | इन्हें नो रूपों को Navdurga के नाम से जाना जाता है |

माँ दुर्गाजी की सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती हैं | इनके शरीर का रंग घने अंधकार की तरह एकदम काला है , सिर के बाल बिखरे हुए हैं , गले में विद्युत की तरह चमकने वाली माला है | इनके तीन नेत्र है ,यह तीनों नेत्र ब्रह्मांड के सदृश गोल है |इनसे विद्युत के समान चमकीले किरणें विस्तृत होती है | इनकी नासिका के स्वास्थ द्वार से अग्नि की भयंकर ज्वाला निकलती रहती है | इनका वाहन गधा है |

ऊपर उठे हुए दाहिने हाथ की वर मुद्रा से सभी को वर प्रदान करती है | दाहिनी तरफ नीचे वाला हाथ अभय मुद्रा में है | बाई तरफ ऊपर वाले हाथ में लोहे का कांटा तथा नीचे वाले हाथ में कटार है | माँ कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है | लेकिन यह सदैव शुभ फल ही देने वाली है | इसी कारण इनका एक नाम शाकंभरी भी है | अंत इनसे भक्तों को भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है |

दुर्गा पूजा के सातवें दिन माँ कालरात्रि की उपासना का विधान है | इस दिन साधक का मन सहस्त्र चार चक्र में स्थित रहता है | भक्त के लिए पुरे संसार की समस्त सिद्धियों का द्वार या रास्ता खुलने लगता है | इस चक्र में स्थित साधक या भक्त का मन पूरी तरह से जय माँ कालरात्रि के स्वरूप में अवस्थित रहता है |

देवी के साक्षात दर्शन मिलने से भक्त अथवा साधक पुण्य का भागी हो जाता है | उसके समस्त पापों विधान विघ्नों का नाश हो जाता है ,उसे अक्षय पुण्य लोगों की प्राप्ति होती है | माँ कालरात्रि दुष्टों का विनाश करने वाली है |

दानव, दैत्य, राक्षस ,भूत ,प्रेत आदि इनके स्मरण मात्र से ही भयभीत होकर भाग जाते हैं | यह ग्रह बाधाओं को भी दूर करने वाली है | ,उपवास करने से सबको अग्नि भय, जंतु भय, शत्रु भय , रात्रि भय आदि कभी नहीं होते | इनकी कृपा से वह स्वरथा भय मुक्त हो जाता है | माँ कालरात्रि की माँ कालरात्रि के स्वरूप विग्रह को अपने हृदय में अवस्थित करके मनुष्य को एक निष्ठा भाव से उनकी उपासना करनी चाहिए | यम नियम संयम का उसे पूर्ण पालन करना चाहिए | मन वचन काया की पवित्रता रखनी चाहिए | वह शाकंभरी देवी है , उपवास नाम से होने वाले सुबह की गणना नहीं की जा सकती | हमें निरंतर उनका स्मरण ध्यान और पूजन करना चाहिए |

|| जय माता दी ||

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