माँ Navdurga जी का नौवा रूप – माँ सिधिदात्री

माँ Navdurga जी का नौवा रूप – माँ सिधिदात्री

माँ Navdurga जी का नौवा रूप – माँ सिधिदात्री

Navdurga हिन्दू पन्थ में माता दुर्गा ,अथवा पार्वती के नौ रूपों को एक साथ कहा जाता है। इन नवों दुर्गा को पापों की विनाशिनी कहा जाता है | दुर्गा सप्तशती ग्रन्थ के अन्तर्गत देवी कवच स्तोत्र में निम्नांकित श्लोक में Navdurga के नाम दिये गए हैं |

|| श्लोक|| Navdurga मंत्र

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।

तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ।।

पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।

सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम् ।।

नवमं सिद्धिदात्री च Navdurga: प्रकीर्तिता:।

उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना ।।

माँ दुर्गा के 9 रूप होते है | इन्हें नो रूपों को Navdurga के नाम से जाना जाता है |

माँ दुर्गा जी की नवी शक्ति का नाम सिद्धीदात्री है यह सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली है मारकंडे जी के अनुसार अणिमा  ,महिमा, गरिमा ,लघिमा ,प्राप्ति ,प्रक्याम, इशितव , वशितव, यह आठ सिद्धियां होती है ब्रह्मवर्त पुराण के श्री कृष्ण जन्म खंड में यह संख्या 18 बताई गई है इनके नाम इस प्रकार है |

माँ सिद्धिदात्री भक्तों और साधकों से सभी प्रकार की  सिद्धियां प्रदान करने में समर्थ है | देवी पुराण के अनुसार भगवान शिव ने इनकी कृपा से ही इन सिद्धियों को प्राप्त किया था |

इनकी अनुकंपा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था | इसी कारण वह लोक में अर्धनारीश्वर नाम से भी जाने जाते हैं | माँ सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं, इनका वाहन सिंह है | यह कमल पुष्प पर भी हसीन होती है | इनकी दाहिनी तरफ के नीचे वाले हाथ में चक्र ऊपर वाले हाथ में गधा तथा बाई तरफ नीचे वाले हाथ में शंख और ऊपर वाले हाथ में कमल पुष्प है |

नवरात्र पूजन के नवे दिन इनकी उपासना की जाती है |इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठावान के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है |  सृष्टि में कुछ भी उसके लिए आग में नहीं रह जाता साधक में  पूर्ण विजय प्राप्त करने की सामर्थ्य उसमें आ जाती है  |

प्रत्येक मनुष्य का यह कर्तव्य है कि वह मां सिद्धिदात्री की कृपा प्राप्त करने का निरंतर प्रयत्न करें उनकी आराधना की ओर अग्रसर हो इनकी कृपा से सांसारिक दुख से व मोह से भक्त मुक्त हो जाता है और सरे सुखो का अनुभव करने लगता है | तथा अंत में भगवान शिव के साथ आनंद करता हुआ मोक्ष को प्राप्त होता है |

Navdurga में मां सिद्धिदात्री अंतिम है ,अन्ना 8 गुड़गांव की पूजा उपासना शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार करते हुए भक्त दुर्गा के नवे दिन इनकी उपासना उपासना में प्रयुक्त हो जाते हैं |

इन सिद्धिदात्री माँ की उपासना पूर्ण कर लेने के बाद भक्तों और साधकों की अलौकिक परलोकिक सभी कामनाओं की पूर्ति हो जाती है | लेकिन सिद्धिदात्री माँ के कृपा पात्र भक्तों के भीतर कोई ऐसी कामना शेष बस्ती ही नहीं है | जिसे वह पूर्ण करना चाहे वह सभी सांसारिक इच्छाओं आवश्यकताओं और मानसिक रूप से माँ भगवती के दिव्य लोगों में विचरण करता हुआ उनके कृपा रस पीयूष का निरंतर पान करता है |

विषय भोग सुनने हो जाता है ,मां भगवती का परम सानिध्य उसका सर्व सब हो जाता है | इस परम पद को पाने के बाद उसे अन्य किसी भी वस्तु की आवश्यकता नहीं रह जाती | मां के चरणों का यह सानिध्य प्राप्त करने के लिए हमें निरंतर नियम निष्ठ रहकर उनकी उपासना करनी चाहिए मां भगवती का स्मरण ध्यान पूजन हमें इस संसार की अभिलाषाओ का बोध कराता है , वास्तविक परम शांति दायक अमृत पद की ओर ले जाने वाला है |

                                  

|| जय माता दी ||


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